लखनऊ के कई इलाके आग के मुहाने पर हैं। इन इलाकों की संकरी गलियां, मनमाने निर्माण और सड़कों पर कब्जा कर खुली दुकानें हालात बिगाड़ रही हैं। यहां अग्निकांड हो जाए तो समय से राहत कार्य शुरू नहीं हो सकता। जो हाल दिल्ली की अनाज मंडी में रविवार तड़के अग्निकांड में हुआ वहीं हादसा यहां भी हो सकता है। इसके पहले भी इंदिरानगर व नाका थानाक्षेत्र में दो बड़े हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में एक दर्जन से अधिक लोग जान गवां चुके हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों ने हाथ बांध रखे हैं। दिल्ली की अनाज मंडी में रविवार तड़के हुए अग्निकांड में 43 लोगों की मौत हो गई। वहां अग्निशमन विभाग के मानकों की अनदेखी कर कारखाना चलने की बात सामने आई। ऐसे हालात लखनऊ में भी हैं। घनी आबादी में फैक्टरियां चल रही हैं। यहां अग्निशमन विभाग की चेतावनी के बाद भी सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं।
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फैक्टरियों समेत इन जगहों में सुरक्षा के मानक अधूरे, कभी भी हो सकता है दिल्ली जैसा बड़ा अग्निकांड
Mon, 09 Dec 2019 12:18 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 09 Dec 2019 12:18 PM IST
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अमीनाबाद में संकरी गली में बहुमंजिला इमारत व इंदिरा नगर में आग ( फाइल फोटो))
- फोटो : अमर उजाला
होटल में लगी आग (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इन होटलों में लग चुकी है आग
3 मई 2016 हजरतगंज के सप्रू मार्ग स्थित गोमती होटल
7 मई 2017 गाजीपुर थाना क्षेत्र होटल बेबियन
20 जून 2016 नाका के होटल संता इन में
3 मई 2016 हजरतगंज के सप्रू मार्ग स्थित गोमती होटल
7 मई 2017 गाजीपुर थाना क्षेत्र होटल बेबियन
20 जून 2016 नाका के होटल संता इन में
होटल में लगी आग (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
होटल अग्निकांड में सात ने गंवाई जान
नाका थानाक्षेत्र के पानदरीबा इलाके में 19 जून 2018 को एसएसजे इंटरनेशनल होटल और विराट इंटरनेशनल होटल में आग लगने से एक मासूम सहित सात लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के वक्त होटल में 70 लोग ठहरे थे। मामले में होटल मालिक के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने कई होटलों के खिलाफ कार्रवाई की। इसके पहले 15 अप्रैल 2018 को विभूतिखंड इलाके के बेहननपुरवा स्थित झुग्गी बस्ती में आग लगने से 25 झोपड़ियां राख हो गईं और तीन साल मासूम देव की मौत हो गई।
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आग
- फोटो : अमर उजाला
ट्रॉमा सेंटर अग्निकांड में लीपापोती
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में जुलाई 2017 में आग लगी थी। अग्निशमन विभाग ने ट्रॉमा सेंटर, शताब्दी फेज-एक व दो, बाल रोग विभाग, यूरोलॉजी, सर्जरी विभाग समेत सभी विभागों का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट में बताया गया कि सभी जगह स्मोक अलार्म के साथ-साथ फायर हाइड्रेंट खराब हैं। पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। केजीएमयू प्रशासन मामले में कार्रवाई करने की बजाय मामले में लीपापोती करके बैठ गया।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में जुलाई 2017 में आग लगी थी। अग्निशमन विभाग ने ट्रॉमा सेंटर, शताब्दी फेज-एक व दो, बाल रोग विभाग, यूरोलॉजी, सर्जरी विभाग समेत सभी विभागों का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट में बताया गया कि सभी जगह स्मोक अलार्म के साथ-साथ फायर हाइड्रेंट खराब हैं। पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। केजीएमयू प्रशासन मामले में कार्रवाई करने की बजाय मामले में लीपापोती करके बैठ गया।
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आग (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
गैस चूल्हा गोदाम में आग से पांच की गई थी जान
1 मई 2019 को इंदिरानगर की राम विहार कॉलोनी में चल रहे गैस चूल्हा गोदाम में आग लगने से एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हुई थी। हादसे में प्रतापगढ़ निवासी तीर्थ राज सिंह का बेटा जगदंबिका (30), बहू जूली (28), पोती शक्ति (7 माह), बेटी वंदना (26) और फैजाबाद निवासी भांजे पुनीत सिंह (30) की मौत हो गई थी। उन्होंने आठ साल पहले तकरोही के राम बिहार कॉलोनी फेज-2 में मकान बनाया था। हादसे के बाद जांच शुरू हुई और सात दिन में अग्निशमन विभाग को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। दावा था कि हादसे की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय किये जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
1 मई 2019 को इंदिरानगर की राम विहार कॉलोनी में चल रहे गैस चूल्हा गोदाम में आग लगने से एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हुई थी। हादसे में प्रतापगढ़ निवासी तीर्थ राज सिंह का बेटा जगदंबिका (30), बहू जूली (28), पोती शक्ति (7 माह), बेटी वंदना (26) और फैजाबाद निवासी भांजे पुनीत सिंह (30) की मौत हो गई थी। उन्होंने आठ साल पहले तकरोही के राम बिहार कॉलोनी फेज-2 में मकान बनाया था। हादसे के बाद जांच शुरू हुई और सात दिन में अग्निशमन विभाग को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। दावा था कि हादसे की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय किये जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।