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कल्याण सिंह: जब कारसेवकों की रक्षा में कुर्बान कर दी सरकार, लेटर पैड मंगवा कर खुद से लिखा मुख्यमंत्री का इस्तीफा

Sat, 21 Aug 2021 11:15 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 21 Aug 2021 11:15 PM IST
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Remembering Kalyan Singh and Ayodhya demolishion case during his CM tenure in up
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का शनिवार को लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में निधन हो गया। वो बीते चार जुलाई से अस्पताल में भर्ती थे। डॉक्टरों ने बताया कि सेप्सिस और मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण उनका निधन हुआ है। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। कल्याण सिंह के निधन के बाद एक बार फिर उनका वो किस्सा याद आ रहा है जब उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए खुद अपना लेटरपैड मंगा कर इस्तीफा लिखा था।
Remembering Kalyan Singh and Ayodhya demolishion case during his CM tenure in up
कल्याण सिंह - फोटो : अमर उजाला
बात 30 अक्तूबर, 1990 की है जब यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। इस दौरान राम मंदिर आंदोलन के समय कारसेवकों पर गोली चलाने की घटना के बाद मौजूदा सरकार से टक्कर लेने के लिए भाजपा ने कल्याण सिंह को आगे किया था। कल्याण सिंह भाजपा में अटल बिहारी बाजपेयी के बाद दूसरे सबसे प्रभावी नेता थे। साल भर के अंदर उन्होंने भाजपा को इस स्तर पर पहुंचा दिया कि पार्टी ने 1991 में अपने बलबूते उत्तर प्रदेश में सरकार बना ली। कल्याण सिंह प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने और पदभार संभालते ही उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या का दौरा किया और राम मंदिर का निर्माण करने की शपथ ली।

 
Remembering Kalyan Singh and Ayodhya demolishion case during his CM tenure in up
कल्याण सिंह। - फोटो : amar ujala
उनकी सरकार को एक साल भी नहीं हुआ था कि छह दिसंबर, 1992 को अयोध्या में कारसेवकों ने विवादित ढांचा गिरा दिया। कल्याण सिंह के प्रमुख सचिव रहे सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी योगेंद्र नारायण ने मीडिया से तत्कालीन घटनाक्रम साझा किए थे. जिसके मुताबिक तत्कालीन मुख्यमंत्री अपने कक्ष में वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठकर विवादित ढांचा गिराए जाने की खबर देख रहे थे। तभी तत्कालीन डीजीपी एसएम त्रिपाठी लगभग भागते हुए मुख्यमंत्री आवास पहुंचे।
 
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Remembering Kalyan Singh and Ayodhya demolishion case during his CM tenure in up
कल्याण सिंह - फोटो : amar ujala
डीजीपी ने मुख्यमंत्री से तुरंत मिलने की इजाजत मांगी, लेकिन सिंह ने दोपहर का भोजन खत्म होने तक इंतजार करने को कहा। भोजन के बाद बुलाया तो डीजीपी बोले कि कारसेवक विवादित ढांचे को तोड़ रहे हैं, फायरिंग की अनुमति चाहिए। सिंह ने पूछा कि फायरिंग में कितने लोग मरेंगे? डीजीपी बोले- कारसेवकों ने विवादित स्थल को घेर लिया है। फायरिंग हुई तो बहुत लोग मारे जाएंगे। इसके बाद कल्याण सिंह ने साफ कह दिया कि आंसू गैस या लाठीचार्ज जैसे उपाय कर लीजिए, लेकिन मैं फायरिंग की अनुमति नहीं दूंगा। यह बात मैं कागज पर भी लिखकर दे देता हूं कि आपने गोली चलाने की अनुमति मांगी लेकिन मैंने नहीं दी।
 
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Remembering Kalyan Singh and Ayodhya demolishion case during his CM tenure in up
कल्याण सिंह - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद डीजीपी लौट गए और सिंह टीवी पर ढांचा गिराए जाने का कार्यक्रम देखते रहे। आखिरी ईंट गिरते ही उन्होंने अपना मुख्यमंत्री का आधिकारिक राइटिंग पैड मंगाकर इस्तीफा लिख डाला। उस दौरान कल्याण सिंह ने कहा था कि ये सरकार राम मंदिर के नाम पर बनी थी और उसका मकसद पूरा हुआ। ऐसे में सरकार राममंदिर के नाम पर कुर्बान है।
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