राजधानी लखनऊ में कोविड 19 वायरस कमजोर नहीं हुआ है। हालांकि, बीते दिनों में नए मरीजों की संख्या में कमी आई है। विशेषज्ञ इसके लिए टीकाकरण और हर्ड इम्युनिटी को कारण मान रहे हैं। टीकाकरण की वजह से लोग कम संक्रमित हो रहे हैं। वहीं, सीरो सर्वे के अनुसार 70 फीसदी से ज्यादा आबादी संक्रमित हो चुकी है। ऐसे में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने से उन्हें वायरस के मौजूदा स्ट्रेन से ज्यादा खतरा नहीं है। हमारे शरीर ने इस वायरस के हिसाब से खुद को तैयार कर लिया है। खतरे की बात तब होगी जब वायरस अपना स्वरूप बदले, हालांकि फिलहाल ऐसा नहीं हो रहा है। बावजूद इसके अब भी पूरी सावधानी बरतनी होगी। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ज्यादा से ज्यादा कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग से ही कोरोना से निजात मिल सकती है।
यूपी: कमजोर नहीं हुआ है कोरोना वायरस... इसलिए कम हो रहा है संक्रमण, जानें- आपको खतरा है या नहीं
सीरो सर्वे के अनुसार 70 फीसदी से ज्यादा आबादी संक्रमित हो चुकी है। ऐसे में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने से उन्हें वायरस के मौजूदा स्ट्रेन से ज्यादा खतरा नहीं है। हमारे शरीर ने इस वायरस के हिसाब से खुद को तैयार कर लिया है।
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आर फैक्टर हुआ कम
कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में लोगों के संक्रमित न मिलने का सीधा असर आर फैक्टर पर पड़ रहा है। यह वह पैमाना है, जिससे तय होता है कि एक व्यक्ति कितने और लोगोें को संक्रमित कर सकता है। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में नए व्यक्ति के पॉजिटिव न मिलने से यह काफी कम हो गया है। आर फैक्टर एक से कम होने पर संक्रमण की तेजी पर रोक लगती है।
तीन सवाल... पर जवाब एक ही, संक्रमण भले ही घटा हो लापरवाही न करें
- क्या वायरस कमजोर हो गया है?
वायरस कमजोर या मजबूत नहीं होता। हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर या मजबूत होती है।
- प्रतिरोधक क्षमता लोगों में बढ़ी है तो भी मामले क्यों सामने आ रहे हैं?
हॉ... इक्का-दुक्का मामले सामने आ रहे हैं। सीएमओ के प्रवक्ता डॉ. योगेश रघुवंशी का भी कहना है कि जो संक्रमित मिल रहे हैं, वे उन लोगों के हैं जो किसी अन्य बीमारी से पीड़ित हैं या कम प्रतिरोधक क्षमता वाले हैं।
- संक्रमण की रफ्तार कम है, मुझे खतरा है या नहीं?
हां। प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होने का यह मतलब नहीं कि वायरस के स्वरूप बदलने पर भी खतरा नहीं होगा, इसलिए हमें सावधानी बरतनी होगी।
अस्पताल में भर्ती की संख्या भी 10 से कम
राजधानी में कोरोना के नए मामलों के साथ भर्ती मरीजों की संख्या भी बेहद कम हो गई है। मंगलवार को अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या 10 से भी कम थी। वहीं, संक्रमण के नए केस में ज्यादातर लक्षण विहीन हैं और किसी की स्थिति गंभीर नहीं है।
केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी हिमांशु का कहना है कि लखनऊ की आबादी में जिस तरह संक्रमण के केस कम हुए और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में भी नए मामले नहीं मिल रहे, उससे यही लगता है कि वायरस काफी कमजोर हो गया है। इसकी ट्रेवलिंग स्पीड कम हो गई है। हालांकि, इसके बावजूद अब भी लोगों को सावधान रहना है। वहीं, ज्यादा से ज्यादा कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग से ही वायरस से छुटकारा मिल सकता है।