एक अधूरी प्रेम कहानी के चलते रात में रोता है ये पेड़!
यूपी के कानपुर जिले के घाटमपुर में 250 साल पुराना एक बेहद दुर्लभ पेड़ पाया गया है। वैज्ञानिक महत्व होने के साथ इस पेड़ से बेहद रोचक प्रेम कहानियां जुड़ी हैं।
एक अधूरी प्रेम कहानी के चलते रात में रोता है ये पेड़!
यूपी के कानपुर जिले के घाटमपुर में 250 साल पुराना बेहद दुर्लभ पेड़ पाया गया है। इसे कल्प वृक्ष या पारिजात पेड़ के नाम से भी जानते हैं। ये पेड़ पूरे भारत में बहुत ही कम जगहों पर पाया जाता है। पुराणों में इससे जुड़ी कई रोचक कहानियां हैं साथ ही इस पेड़ का बड़ा वैज्ञानिक महत्व भी है। इस पेड़ को पुत्रजीवा वृक्ष भी कहा जाता है।
एक अधूरी प्रेम कहानी के चलते रात में रोता है ये पेड़!
ये अति दुर्लभ कल्प वृक्ष घाटमपुर क्षेत्र के नंदना और तेजपुर गांवों के बीच पाया गया है। बुधवार को कृषि अनुसंधान केंद्र, दलीप नगर (कानपुर देहात) के कृषि वैज्ञानिकों ने पेड़ का निरीक्षण किया और बताया कि ऐसा ही एक वृक्ष कानपुर देहात जिले के भुजपुरा गांव के पास भी मिला है।
एक अधूरी प्रेम कहानी के चलते रात में रोता है ये पेड़!
घाटमपुर-गजनेर मार्ग स्थित नंदना गांव में प्राचीन शिव मंदिर है। गांव के बुजुर्गों के मुताबिक कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण के समय यहां पेड़-पौधे लगवाए गए थे। तभी कल्प का पौधा भी लगवाया गया होगा। आगे जानें इस पेड़ से जुड़ी बेहद रोचक मान्यताएं...
एक अधूरी प्रेम कहानी के चलते रात में रोता है ये पेड़!
पारिजात वृक्ष को कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। शास्त्रों में कहा गया है कि मंथन से निकलने के बाद इंद्र देव ने इसे स्वर्ग में अपनी वाटिका में लगाया था।