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एयरपोर्ट की तर्ज पर ‘तेजस’ से ‘यूजर चार्ज’ वसूलेगा रेलवे! इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे यात्री

Tue, 23 Jul 2019 01:26 PM IST
ishwar ashish नीरज ‘अम्बुज’/अमर उजाला, लखनऊ
नीरज ‘अम्बुज’/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 23 Jul 2019 01:26 PM IST
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railway will recover user charges from tejas express
तेजस एक्सप्रेस - फोटो : amar ujala

एयरपोर्ट की तर्ज पर रेलवे, तेजस एक्सप्रेस से यूजर यानी हैंडलिंग चार्जेस वसूलने की तैयारी में है। ट्रेन के निजी हाथों में जाने से एक ओर जहां यात्रियों को हवाईजहाज जैसी सुविधाएं मिलेंगी। वहीं रेलवे का स्टाफ बचेगा, खर्चे घटेंगे और खजाना भरेगा। दरअसल, देश की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस के संचालन को लेकर आईआरसीटीसी व रेलवे बोर्ड अधिकारियों की ओर से तैयारियां जोरों से पूरी की जा रही हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि ट्रेन अगस्त से पटरी पर आ सकती है। इस बीच ट्रेन का रैक गोमतीनगर रेलवे स्टेशन के न्यू वॉशिंग पिट पर लाकर खड़ा कर दिया गया है।

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तेजस एक्सप्रेस - फोटो : amar ujala

ट्रेन को निजी हाथों में सौंपने के खिलाफ रेलवे यूनियनों ने मोर्चा खोल रखा है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो पैसेंजरों को कम समय में लखनऊ से दिल्ली का सफर तय करने का मौका मिलेगा और सुविधाएं भी। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ट्रेन निजी हाथों में होगी, पर उसका संचालन रेलवे के स्टेशनों पर होगा, इसलिए एयरपोर्ट की तर्ज पर ट्रेन केआने-जाने, रुकने, मेंटेनेंस वगैरह के एवज में कंपनी से यूजर यानी हैंडलिंग चार्ज भी वसूला जाएगा।

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तेजस एक्सप्रेस - फोटो : amar ujala

 इससे रेलवे का मुनाफा और बढ़ेगा। इस पर फिलहाल मंथन चल रहा है और जल्द ही ट्रेन को पटरी पर लाने से पहले सारी कवायदों से पर्दा उठ जाएगा। ट्रेन लखनऊ जंक्शन से आनंद विहार के बीच चलेगी और महज छह घंटे दस मिनट के भीतर सफर पूरा कर लेगी। ट्र्रेन का स्टॉपेज कानपुर स्टेशन रखा गया है।


 
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तेजस एक्सप्रेस - फोटो : amar ujala
टिकट पर हट सकती है सब्सिडी
रेलवे अधिकारी बताते हैं कि रेलवे टिकट पर सब्सिडी देता है, जिसका जिक्र टिकट पर भी होता है। ऐसे में जब ट्रेन निजी हाथों में होगी तो रेलवे को इस सब्सिडी की भी बचत होगी। ऐसे आसार जताए जा रहे हैं कि निजी कंपनी पैसेंजरों को जो टिकट देगा, उस पर सब्सिडी नहीं होगी, जिससे किराया भले ही महंगा हो। लेकिन यात्रियों को उसके एवज में विमान जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी। दूसरे, सिर्फ उतने टिकटों की बिक्री होगी, जितनी ट्रेन में सीटें हैं। वेटिंग के टिकट नहीं बनाए जाएंगे।

 
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तेजस एक्सप्रेस - फोटो : अमर उजाला
कम स्टाफ की जरूरत पड़ेगी
तेजस के संचालन से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि एक ट्रेन को चलाने पर रेलवे को खासा स्टाफ इंगेज करना पड़ता है। फिर उनके टीए-डीए समेत अन्य खर्चे मिलाकर एक बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। पर, तेजस एक्सप्रेस में रेलवे का स्टाफ बचेगा, जिससे खर्चे घटेंगे। मसलन, एक ट्रेन केचलने पर रेलवे को हर तीन डिब्बों पर एक टीटीई, एक कोच अटेंडेंट प्रति एसी बोगी, आरपीएफ एस्कॉर्ट, एक इलेक्ट्रिकल अटेंडेंट, दो लोको पायलट, एक गार्ड समेत मेंटेनेंस स्टाफ लगाना पड़ता है।
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