छत्तीसगढ़ के सुकमा में शुक्रवार रात नक्सली हमले में शहीद हुए अमेठी के अनिल कुमार मौर्य के परिवार का बुरा हाल है। उनकी पत्नी प्रभावती यह कहते हुए बिलख रही थीं कि शुक्रवार रात आठ बजे पति से फोन पर बात हुई थी। सब कुछ ठीक था। उन्होंने कहा था कि रात की ड्यूटी है। अब ड्यूटी पर जा रहा हूं। छोटे भाई अजय यह कहकर रो रहे थे कि दोपहर भइया से बात हुई थी। वे बिलकुल ठीक थे। होली पर अनिल कुमार 22 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। छुट्टी बिताने के बाद वह दस मार्च को ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे। उन्हें क्या पता था कि यह होली उनकी आखिरी होगी। घर से जाने के कुछ दिन बाद नक्सली हमले में अनिल बालबाल बचे थे, जिसकी जानकारी अनिल ने परिवारीजनों को दी थी।
राहुल गांधी ने शहीद के पिता से फोन पर बात कर दी सांत्वना, शहादत पर पिता बोले- अनहोनी का था आभास
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सपने में हुआ था पिता को अनहोनी का आभास
शहीद के पिता राम पियारे रोते-रोते यह कह रहे थे कि अनिल के साथ कुछ अनहोनी का स्वप्न उन्हें रात में आया था। सुबह बुरी खबर आ गई। (शहीद अनिल कुमार मौर्य व सांत्वना देते सांसद राहुल गांधी के प्रतिनिधि चंद्रकांत पांडेय।)
भरा-पुरा परिवार छोड़ गए अनिल
शहीद अनिल कुमार मौर्य का जन्म 16 जनवरी 1967 को ब्लॉक के गांव पूरे खोझवा मजरे नरैनी में हुआ था। अनिल के पिता राम पियारे मौर्य ब्लॉक गौरीगंज के पडरी इंटर कॉलेज में अध्यापक थे। तीन भाई और तीन बहनों में अनिल सबसे बड़े थे। शहीद अनिल कुमार की पत्नी प्रभावती है। शहीद के दो पुत्र व दो पुत्रियां हैं। (जिले की डीएम व शहीद की पत्नी (लाल साड़ी में।)
जिलाधिकारी शकुंतला गौतम ने बताया कि शहीद का पार्थिव शरीर विमान से रायपुर से लखनऊ लाया जाएगा। वहां से सड़क मार्ग से देर रात गांव पहुंचेगा। (शहीद के परिवारीजन।)
मिलनसार और जांबाज थे अनिल
शहीद अनिल के साथियों और ग्रामीणों के अनुसार, वे बहुत मिलनसार थे। इस बार जब वे छुट्टी पर आए थे तब उन्होंने गांव के चकरोड को श्रमदान कर दुरुस्त करवाया था। ग्रामीणों का कहना है कि एक बार पड़ोस के गांव में डकैती पड़ी थी। घटना की जानकारी पर अनिल अकेले ही लाठी लेकर वहां पहुंच गए थे। (तस्वीर में- शहीद अनिल कुमार मौर्य।)