कोरोना महामारी के साये में रहे साल 2020 का अंत सियासी तपिश के साथ हो रहा है। करीब 6 माह तक ठप रही राजनीतिक गतिविधियां तेजी पकड़ने लगी हैं। विलंब से ही सही, शिक्षक व स्नातक क्षेत्र से विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव संपन्न हो गए। 7 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव और राज्यसभा चुनाव हो गए। साल के आखिरी महीने में तीन कृषि बिलों को लेकर राजनीति गरमाई रही।
यूपी में भाजपा के दबदबे के बीच ओवैसी की इंट्री ने मचाई हलचल, साल के अंत में आक्रामक हुए अखिलेश
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लॉकडाउन में सियासी चौसर पर भारी पड़ी भाजपा
लॉकडाउन के दौरान जब देश-प्रदेश में राजनीतिक, धार्मिक व आर्थिक गतिविधियां ठप हो गईं थी तब भाजपा ने ‘सेवा ही संगठन’ के नए नारे के साथ मैदान में उतरकर लोगों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
खास बात यह रही कि पूरे कोरोना काल में विपक्ष एक तरह से भाजपा के पीछे चलता नजर आया। सेवा कार्यों के बहाने ही सही, कोरोना की चुनौतियों के बीच भाजपा नेतृत्व ने लोगों से लगातार डिजिटल संवाद व संपर्क किया। इसी साल भाजपा को प्रदेश की नई टीम, राधामोहन सिंह के रूप में नए प्रदेश प्रभारी और दो सह महामंत्री (संगठन) कर्मवीर सिंह और भवानी सिंह मिले।
भाजपा का दबदबा: राज्यसभा में बढ़ी ताकत, सियासी समीकरण उभरे
नवंबर माह में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव में जहां भाजपा की ताकत बढ़ी है, वहीं नए सियासी संकेत भी मिले। अपने दांव से बसपा एक सीट पाने में कामयाब जरूर रही, लेकिन उसमें बगावत की चिंगारी भी फूट गई। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह समेत भाजपा के 8 नेता राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए।
सपा से रामगोपाल यादव और बसपा से रामजी गौतम भी राज्यसभा के लिए चुने गए। उधर, बसपा उम्मीदवार गौतम के चार प्रस्तावकों ने नामांकन पत्र पर अपने हस्ताक्षर होने से इन्कार किया था। इसके बावजूद उनका नामांकन सही ठहराया गया। बसपा के कुछ विधायकों की बगावत के बाद मायावती ने यह कहकर नई राजनीति का संकेत दिया कि विधान परिषद चुनाव में सपा को हराने के लिए वह भाजपा का समर्थन कर सकती है। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनके बयान को गलत ढंग से लिया गया है।
विधानसभा उपचुनावों में दिखाया दम
नवंबर में विस की 7 सीटों पर उपचुनाव में भाजपा ने 6, सपा ने एक सीट बरकरार रखी। 6 सीटों को फिर से जीतकर भाजपा ने अपना दबदबा बरकरार रखा। कांग्रेस बांगरमऊ (उन्नाव) में और बसपा बुलंदशहर और घाटमपुर में दूसरे स्थान पर रही।
इन उपचुनाव में दिवंगत कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान की पत्नी संगीता चौहान नौगांवा सादात (अमरोहा) से, विधायक वीरेंद्र सिंह सिरोही की पत्नी उषा सिरोही बुलंदशहर से और पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव मल्हनी (जौनपुर) से विजयी रहे।
आखिर में सपा हुई आक्रामक: अखिलेश मैदान में उतरे, किसानों को लेकर घेराबंदी
सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नए कृषि बिलों के विरोध और किसान आंदोलन के समर्थन में इस साल के जाते-जाते तेवर दिखा ही दिए। 8 दिसंबर को उन्होंने किसान यात्रा में शामिल होने के लिए कन्नौज जाने का एलान किया था।
पुलिस ने विक्रमादित्य मार्ग पर उनके आवास से सपा मुख्यालय तक बैरिकेडिंग करके जबरदस्त घेराबंदी की। पहले उन्हें बाहर ही नहीं निकलने दिया गया। इसके बावजूद वह बंदरिया बाग चौराहे तक पहुंचे गए। पुलिस ने उन्हें वहां रोका तो उन्होंने सड़क पर बैठकर धरना दिया। उनके खिलाफ महामारी एक्ट में केस दर्ज किया है।