कोई सिर पर भगवान गणेश की मूर्ति को उठाए गणपति बप्पा मोरया... बोले गोमा की चला जा रहा था तो कोई अपनी गोद में मंगलमूर्ति लिए जयकारा लगाते पहुंचा। वाहनों में सवार होकर गणपति की मूर्ति के साथ तो कोई कार में ही अपने गणेशा को लेकर पहुंचा। चारों ओर गाजे-बाजे की धुन पर थिरकते भक्त गजानन को विदा करने आए थे। यह नजारा था झूलेलाल घाट का जहां बृहस्पतिवार को पूजा पंडालों व घरों में पूजन के बाद गणपति को विसर्जन के लिए लेकर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची।
2 of 9
गणपति विसर्जन
- फोटो : amar ujala
सुबह से शाम तक गणपति को विसर्जित करने के लिए घाटों पर लोग पहुंचते रहे। दोपहर से पहले बादलों की लुकाछिपी के बीच भक्त उमस से परेशान रहे तो दोपहर बाद रुक -रुक कर धीमी व तेज बौछारों ने गजानन के भक्तों को तर-बतर कर मौसम को खुशनुमा कर दिया।
3 of 9
गणपति विसर्जन
- फोटो : amar ujala
घाटों पर गजानन को धूप, दीप, आरती से पूजन कर मोदक का भोग लगाया गया। इसके बाद भक्तों ने उन्हें गोमती में विसर्जित किया।
4 of 9
गणपति विसर्जन
- फोटो : amar ujala
बप्पा की यात्रा में शामिल हुए देवी-देवता
झूलेलाल वाटिका में पिछले 11 दिनों से विराजे मनौतियों के राजा की विसर्जन यात्रा शाम करीब चार बजे मैदान से सड़क पर आई। उससे पहले यहां बारिश से बचने को बप्पा को तिरपाल से बचाया गया। आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना कर उन्हें रवाना किया, बप्पा का रथ खींचते भक्त गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ.. केजयघोष संग वहां से निकले। सबसे आगे नासिक का 21 लोगों का ढोल बैंड मराठी वेशभूषा में चला। 15 घोड़े, 15 रथों पर देवता बने बच्चे विराजे।
5 of 9
गणपति विसर्जन
- फोटो : amar ujala
रास्ते भर गायक संजय शर्मा देवा हो देवा गणपति देवा तुमसे बढ़कर कौन, सच्चा है तेरा दरबार तेरा जवाब नहीं... समेत तमाम गाने सुनाते चले। लविवि मार्ग, आईटी चौराहा, निरालानगर के बाद डालीगंज बाजार में यात्रा में शामिल भक्तों को दुकानदारों ने दर्जनों जगह कई मेन्यू का भोग कराया, आरती उतारी, फूल बरसाये। संरक्षक भारत भूषण गुप्ता समेत तमाम ने अगुवाई की। रास्ते भर बप्पा केरथ पर रखे मेवे से बने 108 किलो के मोदक का भोग बंटा।