गोमती का किनारा, चारों तरफ से ढोल-नगाड़ों की आवाज पर थिरकते बच्चे और युवा, नदी किनारे सजी सुशोभिता को पूजतीं सोलह सिंगार में सजी-धजी सुहागिनें। दउरा व सूप सजाते घर के पुरुष व बच्चे। यह नजारा लक्ष्मण मेला, झूलेलाल, कुड़िया घाट पर बने पूजा स्थलों पर था। अपार्टमेंट परिसरों, पार्कों व छतों पर बनाए कृत्रिम तालाबों पर भी आदित्योपासना के लिए परिवार इकट्ठा थे।
छठ पूजा: गोमती के तट पर आस्था और उल्लास का सैलाब, किसी ने संतान तो किसी ने यूपीएससी ने सफलता की कामना की
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किसी ने मांगा संतान का आशीर्वाद तो किसी ने सिविल सर्विसेज में सफलता
एक तरफ आस्था का सैलाब उमड़ा हुआ तो दूसरी तरफ इच्छित वर प्राप्ति का विश्वास मन में लिए सभी ने झोली भगवान भास्कर के आगे फैला रखी थी। अर्घ्य की धार के साथ चिनहट से आईं मालती ने अच्छे घर में विवाह के लिए भगवान को धन्यवाद कहा और संतान के लिए प्रार्थना की। वहीं, इंदिरानगर निवासी रौनक और रुचि ने सिविल सर्विसेज में सफलता की कामना की।
चालीस साल से व्रत करती आ रहीं आशा देवी इस साल व्रत बहू को सौंप कर खुद को धन्य मान रही हैं। बहू अमृता का कहना था कि एक झिझक तो है कि इतना कठिन व्रत का पालन कैसे कर पाऊंगी पर हो जाएगा ऐसा भरोसा है।
पहले अर्घ्य, फिर सेल्फी तो जरूरी है, वीडियो कॉल करके कराया दर्शन
कमर तक पानी में उतरे परिवार के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं था। पहले अर्घ्य देकर पूजा पूरी की, उसके बाद शुरू हुआ सेल्फी का सिलसिला। इसके बाद वीडिया कॉलिंग कर दूर बैठे अपनों को छठ पूजा का ऑनलाइन दर्शन कराया लोगों ने।
एकदम मेले जैसा माहौल
लक्ष्मण मेला स्थल पर चारों तरफ पेड़ों पर लगी रंग बिरंगी लाइटें, आतिशबाजी, आसमान में उड़तीं कंदीलें। कहीं बिक रही थी बाम्बे मिठाई तो कहीं फूंक मारकर चलने वाली फिरकी एकदम मेले जैसे माहौल का अहसास करा रही थी।
सांस्कृतिक मंच भी सजा
अखिल भारतीय भोजपुरी समाज द्वारा आयोजित पूजा स्थल पर स्थानीय कलाकारों ने गीत-संगीत-नृत्य से समां बांधा और भोर तक प्रस्तुतियां चलती रहीं।