उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे एनडी तिवारी का बृहस्पतिवार को दिल्ली के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। वह 93 वर्ष के थे। एनडी तिवारी का विवादों से गहरा नाता रहा है। अपने निजी संबंधों को लेकर वह अक्सर मीडिया में चर्चा में रहे हैं।
उन्होंने अपने जैविक पुत्र रोहित शेखर की मां उज्ज्वला शर्मा से 88 वर्ष की उम्र में विवाह किया था। इसके पहले उज्ज्वला से विवादों को लेकर चर्चा में रहे। डीएनए टेस्ट के बाद साबित हुआ कि रोहित शेखर उनका जैविक पुत्र है। उज्ज्वला से विवाह के बाद तिवारी आखिर तक उज्ज्वला के साथ ही रहे।
नारायण दत्त तिवारी का जन्म 1925 में नैनीताल जिले के बलूती गांव में हुआ था। तिवारी के पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग में अधिकारी थे।
महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के आह्वान पर पूर्णानंद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। नारायण दत्त तिवारी शुरुआती शिक्षा हल्द्वानी, बरेली और नैनीताल में हुई। अपने पिता के तबादले की वजह से उन्हें एक से दूसरे शहर में रहते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की। अपने पिता की तरह ही वे भी आजादी की लड़ाई में शामिल हुए।
1947 में आजादी के साल ही वह इस विश्वविद्यालय में छात्र यूनियन के अध्यक्ष चुने गए। यह उनके सियासी जीवन की पहली सीढ़ी थी। आजादी के बाद 1950 में उत्तर प्रदेश के गठन और 1951-52 में प्रदेश के पहले विधानसभा चुनाव में तिवारी ने नैनीताल (उत्तर) सीट से सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर हिस्सा लिया।
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एनडी तिवारी
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साल 1963 से शुरू हुआ कांग्रेस के साथ तिवारी का रिश्ता
कांग्रेस की सियासत करने वाले तिवारी की शुरुआत सोशलिस्ट पार्टी से हुई। 431 सदस्यीय विधानसभा में तब सोशलिस्ट पार्टी के 20 लोग चुनकर आए थे। कांग्रेस के साथ तिवारी का रिश्ता 1963 से शुरू हुआ।
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nd tiwari
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वह अकेले राजनेता हैं जो दो राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश के विभाजन के बाद वे उत्तरांचल के भी मुख्यमंत्री बने। केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्हें याद किया जाता है। 1990 में एक वक्त ऐसा भी था जब राजीव गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी दावेदारी की चर्चा भी हुई।