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UP: जज को प्रभावित करने में मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति पर चलेगा मुकदमा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार
Sun, 23 Aug 2026 10:42 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Sun, 23 Aug 2026 10:42 PM IST
सार
मामले में सिविल जज ने बताया था कि 15 जुलाई को मंडलायुक्त से फोन पर बात हुई। इस दौरान लंबित मामले पर भी चर्चा हुई। हाईकोर्ट ने कहा कि मंडलायुक्त ने फोन करने से इन्कार नहीं किया है।
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मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने देवीपाटन की मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के गोंडा की सिविल जज शबीना खान को लंबित भूमि विवाद में प्रभावित करने के आरोप को गंभीरता से लिया है। लखनऊ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी ने कहा कि जज को फोन कर डाला गया कथित दबाव प्रथमदृष्टया न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। यह न्याय प्रशासन में बाधा पैदा करता है।
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हाईकोर्ट ने वरिष्ठ आईएएस के खिलाफ मामले को आपराधिक अवमानना के तहत विचार करने की जरूरत बताई है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश से आवश्यक दिशानिर्देश लेकर मामले को उपयुक्त अदालत के समक्ष रखा जाए। मामला देवीपाटन मंडल के आयुक्त के नाम दर्ज कई नजूल भूमि के टुकड़ों से संबंधित है।
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कोर्ट ने शुक्रवार को यह आदेश ज्योति विद्या मंदिर स्कूल और नगर पालिका परिषद गोंडा के बीच 1997 से लंबित मुकदमे के दूसरी अदालत में स्थानांतरण की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें न्यायिक कार्यवाही से जुड़े मामलों में न्यायाधीशों पर दबाव डालने को गंभीरता से लिया गया है।
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15 जुलाई को हुई थी फोन पर बात
सिविल जज ने बताया था कि 15 जुलाई को मंडलायुक्त से फोन पर बात हुई। इस दौरान लंबित मामले पर भी चर्चा हुई। हाईकोर्ट ने कहा कि मंडलायुक्त ने फोन करने से इन्कार नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि लंबित मुकदमे के संबंध में इस तरह अदालत से संपर्क करना उचित नहीं है।