नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बृहस्पतिवार को लखनऊ की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया। प्रदर्शनकारियों ने राजधानी की दो पुलिस चौकियां फूंक दीं। रोडवेज बस समेत 30 से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया। भीषण पथराव के साथ कई राउंड फायरिंग की। इस दौरान तीन नागरिकों को गोली लग गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। उग्र प्रदर्शन और आगजनी की लोगों ने निंदा की।
लखनऊ हिंसाः उग्र प्रदर्शन और आगजनी की लोगों ने की निंदा, ईदगाह के इमाम ने कही ये बात
आंदोलन का तरीका गलत
प्रदर्शन का ये तरीका समाज को बांटने की कोशिश है। मजहब और जाति की राजनीति के मंसूबे को सफलता मिलने में सहायक है। ऐसे कृत्यों पर सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए। लोेगाें के आंदोलन का यह तरीका बेहद घटिया है, जितनी भर्त्सना की जाए कम है। - जितेंद्र सिंह चौहान
हाथ में नहीं ले सकते कानून
लोकतंत्र में प्रदर्शन करने का अधिकार तो है, लेकिन कानून को हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। जो लोग नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे, उनको उसकी एबीसी तक पता नहीं है। वह समाज के ठेकेदार के इशारे पर नाच रहे हैं। - अतुल जैन
आगजनी व तोड़फोड़ गलत
विरोध प्रदर्शन के नाम पर आगजनी और तोड़फोड़ बेहद अफसोस जनक है। नागरिकता संशोधन एक्ट के विरोध करने के बहाने विपक्षी पार्टियों ने जिस तरह जनता को उकसा कर सरकारी संपत्ति को जो हानि पहुंचाई उसको सबने देखा है। विपक्ष की गंदी राजनीति का शिकार बनने से जनता बचे । - गौरव माहेश्वरी
तरीका ठीक नहीं
लोकतंत्र में अपनी बात रखने का मौका सबको दिया जाता है, पर इसका बेजा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अगर सीएए से परेशानी हैं तो बेशक विरोध करे, लेकिन हंगामा, तोड़फोड़ व हिंसा के जरिए नहीं। लोकतंत्र में इसके लिए कोई जगह नहीं है। ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। - एसके शंखवार, सहायक वाणिज्य प्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे