गर्भधारण से पहले थैलेसीमिया कैरियर की जांच करा कर होने वाले शिशु को इससे बचाया जा सकता है।
खून न बनने की बीमारी थैलेसीमिया माता-पिता से बच्चों में आती है। इसलिए गर्भधारण करने से पहले माता-पिता में इस बीमारी के कैरियर की मौजूदगी की जांच करानी चाहिए। यदि एक बार थैलेसिमिक बच्चे का जन्म हो गया तो उसे जीवन भर खून चढ़ाना पड़ता है क्योंकि इस बीमारी में खून नहीं बनता है।
समय पर खून न चढ़ाने से मरीज की मौत भी हो सकती है। संजय गांधी पीजीआई के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की हेड प्रो. शुभा फडके के अनुसार, थैलेसीमिया का पता सिर्फ मात्र पांच सौ रुपये खर्च करके लगाया जा सकता है। इसमें मां व पिता की जांच की जाती है। दोनों इस बीमारी के कैरियर है तो बच्चे को भी थैलेसीमिया होने की आशंका होती है। इसलिए माता-पिता बनने से पहले दंपती को थैलेसीमिया जांच करानी चाहिए।
हीमोग्लोबिन ए-2 जांच से पता लगाया जा सकता है कि मां या पिता थैलेसीमिया के कैरियर तो नहीं हैं। इसके अलावा इस बीमारी का पता लगाने का कोई तरीका नहीं है। इसी जांच से जानलेवा अनुवांशिक बीमारी से बच्चे को बचाया जा सकता है। हर गर्भवती को खून की जांच कर ये पता लगाना चाहिए कि कहीं मां इस बीमारी की कैरियर तो नहीं।
यदि मां कैरियर निकलती है तो फिर पिता की जांच भी करायी जाती है। यदि दोनों ही थैलेसीमिया के कैरियर निकलते हैं तो गर्भस्थ की तीन माह के अंदर खून की जांच की जाती है। यदि बच्चा बीमारी से ग्रस्त मिलता है तो परिवार को गर्भपात कराने की सलाह दी जाती है। संजय गांधी पीजीआई में हीमोग्लोबिन ए-2 जांच की सुविधा उपलब्ध है। परीक्षण में दोनों में इसका स्तर बढ़ा मिले तो होने वाले बच्चे में मेजर थैलेसीमिया की आशंका 20 प्रतिशत रहती है।