देश की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस की सुरक्षा महज तीन आरपीएफ सिपाहियों के भरोसे हैं। कुल 19 बोगियों वाली ट्रेन की सुरक्षा में इनकी ड्यूटी तीन शिफ्टों में लगाई जा रही है। इससे ट्रेन की सुरक्षा को खतरा है। यह स्थिति तब है, जब बोगियों की कीमत तकरीबन 48 करोड़ रुपये है। बता दें कि जब डबलडेकर एक्सप्रेस लखनऊ आई थी तो उसके रैक की सुरक्षा में करीब दर्जनभर सिपाहियों की ड्यूटी लगी थी।
तेजस की सुरक्षा में लापरवाही पड़ सकती है भारी, चोरी हुआ सामान तो रेलवे को लगेगा बड़ा झटका
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेमी हाईस्पीड ट्रेन तेजस का रैक गोमतीनगर रेलवे स्टेशन कीन्यू वॉशिंग पिट पर खड़ा किया गया है। ट्रेन की सुरक्षा के लिए 24 घंटे में तीन सिपाहियों की ड्यूटी तीन शिफ्टों में लगती है। एक शिफ्ट में सिर्फ एक सिपाही के भरोसे पूरी ट्रेन की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण है। आरपीएफ की मानें तो ट्रेन न्यू वॉशिंग पिट पर खड़ी है। उसके एक ओर स्कूल है, जहां से बच्चे छुट्टी में ट्रैक तक आ जाते हैं।
चोरों ने बिगाड़ दी थी डबल डेकर की हालत
तेजस एक्सप्रेस अत्याधुनिक ट्रेन है। इसमें काफी कीमती उपकरण लगे होने से चोरी की आशंका है। क्योंकि जब डबलडेकर की बोगियां गोमतीनगर स्टेशन पर खड़ी थीं तो उससे भी सामान चोरी हो रहा था और ट्रेन की हालत खराब कर दी गई थी।
ऐसा तब हुआ जबकि ट्रेन की सुरक्षा में एक दर्जन सिपाही लगे थे। ट्रेन में कॉपर, एल्युमिनियम आदि का सामान लगा है। तेजस एक्सप्रेस को स्टेशन से एक किलोमीटर दूर बनी वॉशिंग पिट पर खड़ा किया गया है। ऐसे में सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं।