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Lucknow News: न भद्रा की छाया, न ग्रहण का साया, दिनभर सजेगी भाई की कलाई

Sun, 23 Aug 2026 02:45 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2026 02:45 AM IST
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Free from the shadow of *Bhadra* or the eclipse, the brother's wrist will remain adorned throughout the day.
लखनऊ। भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस बार भद्रा के साये से मुक्त रहेगा। शुक्रवार, 28 अगस्त को बहनों को भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए किसी विशेष मुहूर्त का इंतजार नहीं करना होगा। पूरे दिन रक्षाबंधन मनाया जा सकेगा। इसी दिन लगने वाले खंड चंद्र ग्रहण का भी भारत में असर नहीं रहेगा, क्योंकि यह यहां दिखाई नहीं देगा। ऐसे में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा और धार्मिक व मांगलिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।
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अलीगंज स्थित स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के आचार्य डॉ. अश्विनी पांडेय के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन भद्रा काल से मुक्त रहेगा। 27 अगस्त को सुबह 09:08 बजे से शुरू होने वाला भद्रा काल रात 09:32 बजे समाप्त हो जाएगा। इसके बाद 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने में भद्रा की बाधा नहीं रहेगी। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 09:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 09:48 बजे समाप्त होगी। हालांकि, उदय तिथि और कुलाचार के अनुसार रक्षाबंधन पूरे दिन मनाया जा सकता है।
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राहुकाल में राखी बांधने से बचें

28 अगस्त को सुबह 10:31 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक राहुकाल रहेगा। शास्त्रों के अनुसार राहुकाल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसलिए इस अवधि में राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है।
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भारत में दिखाई नहीं देगा चंद्र ग्रहण
28 अगस्त को सुबह 08:04 बजे से दोपहर 11:22 बजे तक खंड चंद्र ग्रहण लगेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह भारत, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, चीन और जापान सहित एशिया के अधिकांश हिस्सों में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण उत्तर व दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका तथा प्रशांत और अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारत में ग्रहण की दृश्यता नहीं होने के कारण इसका सूतक काल या कोई अशुभ प्रभाव मान्य नहीं होगा। ऐसे में धार्मिक और मांगलिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।


रक्षासूत्र बांधते समय मंत्र का जाप शुभ

रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र बांधते समय पौराणिक मंत्र का जाप शुभ माना जाता है। इस दौरान “ओम येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रों महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल” मंत्र का उच्चारण किया जा सकता है।
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