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बदहाल अवस्था में है 90 साल पुराना लखनऊ का ये थाना, मरम्मत के लिए मिले सिर्फ 80 हजार रुपये
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 17 Oct 2018 03:06 PM IST
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वजीरगंज थाना
- फोटो : amar ujala
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लखनऊ का थाना वजीरगंज सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील होने के साथ इलाके में सिविल कोर्ट, रजिस्ट्रार दफ्तर, बलरामपुर अस्पताल, कैसरबाग बस स्टैंड की वजह से काफी महत्वपूर्ण है। अंग्रेजों ने 90 साल पहले ऊंची इमारत में कैसरबाग कोतवाली की वजीरगंज पुलिस चौकी स्थापित की थी। इलाके की संवेदनशीलता को लेकर चौकी को थाना और फिर कोतवाली बनाकर फोर्स की तैनाती बढ़ाई गई।
वजीरगंज थाना
- फोटो : amar ujala
हालांकि समय से मरम्मत के अभाव में भव्य इमारत जर्जर होती रही, जो अब खंडहर बन चुकी है। कभी भी ढहने की स्थिति में 36 सौ वर्ग मीटर के भवन पर तरस खाकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मरम्मत व रंगाई-पुताई के लिए 80 हजार रुपये दिए हैं।सुरक्षा की दृष्टि से ऊंचाई पर बनी इमारत में अंग्रेजों ने पुलिस चौकी स्थापित कराई थी। इसमें कार्यालय, हवालात, मालखाना व चौकी प्रभारी व कर्मचारियों के लिए चार आवास और दो बैरक बनाई गईं।
वजीरगंज थाना
- फोटो : amar ujala
इससे पहले 3 मई 1928 अधिसूचना कराई गई। 90 साल पुराने भवन में अब वजीरगंज कोतवाली में प्रभारी निरीक्षक के साथ 16 उपनिरीक्षक व 78 कर्मचारी तैनात हैं। रंगाई-पुताई के चलते भव्य इमारत नजर आने वाली कोतवाली के अगले हिस्से में एक तरफ कार्यालय व हवालात और दूसरी तरफ प्रभारी निरीक्षक का कक्ष व मालखाना है। कोतवाली में दाखिल होते ही इमारत की सच्चाई नजर आने लगती है। खंडहर जैसी कोठरी में एसी लगा है।
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वजीरगंज थाना
- फोटो : amar ujala
दरअसल, वह कंप्यूटर कक्ष है। प्रभारी निरीक्षक का आवास तो काफी विशाल है, लेकिन बरसात के दिनों में कमरे में भी छाते की जरूरत पड़ जाती है। छत को पॉलिथीन से ढका गया है। वरिष्ठ उपनिरीक्षक के आवास की स्थिति और भी बदतर है। दरवाजे में इतनी जगह है कि भीतर से बंद ताला भी खोलकर आवास में दाखिल हुआ जा सकता है। उपनिरीक्षकों के लिए बने दो अन्य आवासों के कभी भी गिरने की आशंका के चलते खाली करा दिया गया है। दोनों बैरकों में जब्त वाहन व अन्य सामान ठूंसा पड़ा है।
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वजीरगंज थाना
- फोटो : amar ujala
जीर्णोद्धार का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
खंडहर हो चली वजीरगंज कोतवाली के जीर्णोद्धार को लेकर कई थाना प्रभारियों ने पत्राचार किया। भवन की संजीदगी से मरम्मत कराने के बजाए रंगाई-पुताई का बजट थमा दिया, जो 36 सौ वर्गमीटर के भवन के लिए पर्याप्त नहीं होता था। इसके चलते कोतवाली का सिर्फ अगला हिस्सा चमकाया जाता रहा और शेष इमारत खंडहर में तब्दील होती गई।
खंडहर हो चली वजीरगंज कोतवाली के जीर्णोद्धार को लेकर कई थाना प्रभारियों ने पत्राचार किया। भवन की संजीदगी से मरम्मत कराने के बजाए रंगाई-पुताई का बजट थमा दिया, जो 36 सौ वर्गमीटर के भवन के लिए पर्याप्त नहीं होता था। इसके चलते कोतवाली का सिर्फ अगला हिस्सा चमकाया जाता रहा और शेष इमारत खंडहर में तब्दील होती गई।