तीन तलाक न इस्लामी है और न कहीं इसका जिक्र अल्लाह की पाक कुरान में मिलता है। एक बार में तीन बार तलाक बोल कर तलाक कराने वाले और इसकी पैरवी करने वाले उलमा व संगठन गैर इस्लामी हैं। यह कहना है शहर की शिया व सुन्नी बुद्धिजीवी व समाजसेवी मुस्लिम महिलाओं का।
मुस्लिम महिलाओं की मांग, तीन तलाक को जड़ से खत्म कर दे केंद्र सरकार
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इस्लाम ही नहीं, कुरान में भी नहीं है तलाक
इस पर समाज सेविका ताहिरा हसन का कहना है कि तलाक- तलाक- तलाक कह कर महिला का उत्पीड़न करने वाले समझ लें कि तलाक का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है और न एक बार में तीन तलाक का कोई जिक्र है। तीन तलाक की पैरवी करने वाले पहले यह बताएं कि रसूल की जिंदगी में तीन तलाक का एक भी मामला सामने क्यों नहीं है। अगर रसूल की जिंदगी में नहीं आया तो यह इस्लामी हो ही नहीं सकता। कुरान पाक में साफ है कि तलाक के लिए वक्त दिया जाए। ऐसे में तीन तलाक सीधे तौर पर गैर इस्लामी है। शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के उलमा का बयान सराहनीय है।
तीन तलाक पर अड़े उलमा गैर इस्लामी
समाज सेवी रोशन आरा का कहना है कि तलाक के मामले में कई उलमा सरकार से आर-पार की लड़ाई करने को तैयार हैं। इसका मतलब है कि इस तरह के संगठन व उलमा का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है। ये मुसलमानों के सिर्फ मुखौटा हैं। इसका जवाब इन्हें जल्द ही न्यायालय से मिल जाएगा। तीन तलाक पर पूरी तरह पाबंदी के साथ इसके खिलाफ कानून भी बने।
तीन तलाक के खिलाफ जरूर बने सख्त कानून
बेगमात रॉयल फैमिली की अध्यक्ष फरहाना मालिकी कहती हैं कि तीन तलाक से महिलाओं की जिंदगी बर्बाद करने वालों के खिलाफ सख्त कानून व सजा के प्रावधान को लेकर लगातार मांग चल रही है। केंद्र की मोदी सरकार से उम्मीद है कि इस पर जल्द से जल्द बड़ा फैसला होगा। उलमा भी जानते हैं कि तीन तलाक से इस्लाम का कोई वास्ता नहीं है लेकिन अपने वर्चस्व की लड़ाई में वे बंटे हुए हैं। शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले का मुस्लिम महिलाएं स्वागत करती हैं।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की हार तय
समाज सेविका नाइस हसन का कहना है कि तीन तलाक को लेकर शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का बयान सराहनीय है। इसका महिलाएं स्वागत करती हैं। मुस्लिम महिलाओं को अभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है। मुस्लिम महिलाओं की एकजुटता के आगे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की हार तय है।