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पति-पत्नी दोनों बने आईएएस, UPSC में इन सबने किया लखनऊ का नाम रोशन

Thu, 01 Jun 2017 11:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 01 Jun 2017 11:49 AM IST
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Lucknow youth in UPSC.

हमेशा की तरह ही देश की सबसे प्रति‌ष्ठित परीक्षा में लखनऊ की प्रतिभा ने अपनी चमक बिखेरी। बिलाल को दसवीं रैंक मिली तो पति-पत्नी को एक साथ इस परीक्षा में सफलता मिली।



केजीएमसी से 2006 बैच के एमबीबीएस डॉ. योगेश सागर 2012 में एमबीबीएस पूरा कर दिल्ली गए और सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। 2014 में वे आईआरएस में चयनित हुए और इनकम टैक्स विभाग मिला। 2015 में सेलेक्‍शन नहीं हुआ और 2016 में उन्हें 223वीं रैंक मिली। मूलत: बरेली के निवासी योगेश के पिता स्व. छोटेलाल कस्टम में सिपाही और मां रामेश्वरी देवी गृहिणी हैं।

उन्होंने गवर्नमेंट इंटर कॉलेज से साइंस में इंटर किया। उन्होंने बताया कि जब वह तैयारी के लिए दिल्ली गए तो काफी खर्च होता था। इसकी वजह से उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में जॉब करनी पड़ी। कई बार धैर्य जवाब देता था और लगता था कि कोई छोटी-मोटी नौकरी करनी ही पड़ेगी। हालांकि मैने धैर्य बनाए रखा और सफलता मिली।

डॉ. योगेश कुमार की पत्नी डॉ. अवलोकिता अशोक का भी आईएएस में सेलेक्‍शन हुआ है। उनकी 915वीं रैंक आई है। अवलोकिता ने दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है। अवलोकिता के पिता डॉ. बीपी अशोक बसपा सरकार में लखनऊ में एएसपी पूर्वी रहे हैं।

Lucknow youth in UPSC.

लाखों का पैकेज था, पर पापा का सपना पूरा करने को छोड़ दी नौकरी

इला त्रिपाठी, रैंक 51
इला की शुरुआती पढ़ाई लखनऊ में सीएमएस अलीगंज ब्रांच से हुई। उसके बाद नोएडा से बीटेक करने के बाद ढाई साल तक लखनऊ में प्राइवेट जॉब की। इसी दौरान तैयारी की और नौकरी छोड़कर 2016 मेंदूसरे अटेम्प्ट में बाजी मारी। इला कहती हैं, पिता स्व. पीएन त्रिपाठी आईएफएस अफसर रहे। उनकी दिली इच्छा थी कि मैं सिविल सर्विसेज जॉइन करूं।

मैंने इसके लिए दिन-रात मेहनत शुरू की, पर पिता साथ छोड़ दुनिया से चले गए। मैंने हार नहीं मानी। लाखों का पैकेज था मेरी प्राइवेट जॉब का। आए दिन बाहर का टूर भी लगा रहता था, ऐसे में मुझे लगा कि शायद पापा का सपना पूरा न हो।

करीब ढाई साल तक नौकरी करने के बाद  सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की।  परिवार में मां, भाई और बड़ी बहन के साथ रह रहीं इला पापा केसपने की खुशी का सेलिब्रेशन करने नगर केहनुमान सेतु मंदिर पहुंचीं। मंदिर बंद होने से पहले पूरे परिवार ने दर्शन किये, प्रसाद चढ़ाया।

टिप्स : करेंट अफेयर्स और सेल्फ नोट बढ़िया रहते हैं।

Lucknow youth in UPSC.

देश और समाज के लिए कुछ करने की चाहत ने बनाया आईएएस
- बिलाल मोहिउद्दीन भट (10वीं रैंक)

बिलाल मोहिउद्दीन भट का ताल्लुक भले ही कश्मीर से हो पर लखनऊ से भी गहरा नाता है। आईएफएस असफर बिलाल यहां वन विभाग में डिप्टी कन्जर्वेटर के पद पर तैनात हैं। वर्ष 2013 में आईएफएस में 23वीं रैंक मिली। डीसीएफ के पद पर तैनाती के बावजूद रुके नहीं, अपनी मंजिल यानी आईएएस की धुन में मग्न रहे।

बिलाल कहते हैं, हमेशा से देश के लिए कुछ करने की चाहत थी। बराबर प्रयास करते रहा। हिम्मत नहीं हारी। इसका नतीजा ये कामयाबी है। मूलत: उत्तरी कश्मीर के रहने वाले बिलाल कहते हैं, मैं अपने देश और समाज के लिए कुछ करना चाहता था। सिविल सेवा इसका सबसे अच्छा माध्यम है।

इसलिए मैंने अपना लक्ष्य सिविल सेवा ही रखा था। परीक्षा में सफलता मिली। इसलिए मैं इसका श्रेय अपने परिवार के साथ ही अपने साथियों को भी देना चाहता हूं।

टिप्स- सिविल का कोर्स बहुत ज्यादा है इसलिए हिम्मत न हारें, आत्मविश्वास बनाए रखें और कड़ी मेहनत करते रहें।

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लखनऊ के पूर्व एसएसपी की बेटी ने भी हासिल की कामयाबी

कृति पांडेय- (426वीं रैंक)

एमटेक के बाद कृति पांडेय के पास अच्छी नौकरी थी। शानदार पैकेज के साथ सीमित घंटें नौकरी का मौका था।  पर दिल में सुकून नहीं था। कृति कहती हैं, कुछ करने का जज्बा था इसलिए सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। दूसरे प्रयास में सफलता मिल ही गई।

कृति के पिता राजेश कुमार पांडेय लखनऊ के  पूर्व एसएसपी रह चुके हैं। कृति की मां मीनू पांडेय गृहिणी हैं। उनके अनुसार सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा कृति को अपने पापा से मिली। कृति ने बताया कि सिविल सेवा में सफल होने के लिए जरूरी है कि कड़ी मेहनत की जाए। नोट्स की भूमिका बेहद अहम है। सफलता के लिए अपने पर भरोसा रखें।

टिप्स- नोट्स बनाएं, खुद पर भरोसा बनाएं रखें। हिम्मत न हारें।

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Lucknow youth in UPSC.
कड़ी मेहनत और समर्पण से मिलती है सफलता

सी. दिनेश कुमार (24वीं रैंक)

सिविल सेवा में सफलता के लिए जरूरी है कि कड़ी मेहनत की जाए। इसका कोई विकल्प नहीं है। इसके साथ लक्ष्य के प्रति समर्पण भी बेहद जरूरी है। यह कहना है संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 24वीं रैंक हासिल करने वाले सी.दिनेश कुमार का।

इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट लखनऊ में कार्यरत दिनेश का सिविल सेवा में यह छठा प्रयास था। उनके पिता चंद्रशेखर असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर हैं। कोयंबटूर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने वाले दिनेश कुमार ने वर्ष 2015 में 525वीं रैंक हासिल की थी।

इस साल इसमें सुधार करके वे 24वीं रैंक पर आ गए हैं। दिनेश कुमार ने बताया कि परीक्षा के लिए रोजाना चार से पांच घंटे तैयारी करते थे। विषय के हिसाब से  टाइम टेबल तैयार कर लेते थे और लिखकर अभ्यास करते रहते थे।

टिप्स- डेडीकेशन, हार्ड वर्क और फोकस वर्क से ही सफलता मिलती है।
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