लखनऊ हजरतगंज में मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट पर सुरंग का आकार अब नजर आने लगा है। गोमती टीबीएम ने पहले चरण की 300 मीटर की खोदाई पूरी कर ली है। एलएमआरसी का दावा है कि यह गंज में जून के अंत तक ब्रेकथ्रू करेगी यानी बाहर आएगी।
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मेट्रो
- फोटो : amar ujala
भूतल से 15 मीटर नीचे यानी डेंजर जोन, ऑक्सीजन की कमी, जहरीली गैस की आशंका, मिट्टी धंसने का डर, पानी का रिसाव की संभावना और न जाने कितने अंजान खतरे...। इन सबके बीच भी लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) के लिए गुलेरमैक और टाटा प्रोजेक्ट्स के टीबीएम गोमती और गंगा का दो दर्जन से अधिक तकनीकी स्टाफ घंटों सुरंग के अंदर काम में जुटे हैं।
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सुरंग अब आकार लेने लगी है, लेकिन इससे लखनऊ के लोगों को सुविधा देने के लिए वहां काम कर रहे स्टाफ की मेहनत और खतरे के बीच भी जुटे रहने का जुनून बधाई का पात्र है।
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करीब साढ़े छह मीटर व्यास की जगह में टीबीएम और चार कंप्यूटर स्क्रीन का कंट्रोल रूम बनाकर अंधेरा में काम करना किसी एडवेंचर से कम नहीं है। बमुश्किल एक जगह पर चार से छह लोग ही खड़े रह सकते हैं, लेकिन काम जारी है।
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काम सुरक्षित हो इसको सुनिश्चित करने के लिए चार कंपनियां आयेसा, जियो डाटा, आर्वी और केआरएनए संयुक्त रूप से कंसल्टेंट के रूप में काम कर रही हैं। खुदाई का काम ऑस्ट्रेलिया की कंपनी टेराटेक की टीबीएम कर रही हैं। टेराटेक के इंजीनियर्स ही खोदाई के काम को अपनी देखरेख में पूरा करा रहे हैं।