{"_id":"5ab0a4cd4f1c1bbb758b6832","slug":"leopard-caught-after-24-hours","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"24 घंटे बाद पकड़ा गया टनल पास में छिपा तेंदुआ, ऐसे लाया गया लखनऊ जू, देंखे तस्वीरें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
24 घंटे बाद पकड़ा गया टनल पास में छिपा तेंदुआ, ऐसे लाया गया लखनऊ जू, देंखे तस्वीरें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 20 Mar 2018 11:39 AM IST
विज्ञापन
leopard
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोसाईगंज के मल्लूखेड़ा में टनल पास में छिपे बैठे तेंदुए को करीब 24 घंटे बाद वन विभाग की टीम पकड़ सकी। पूरे दिन-रात चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे उसे ट्रैंकुलाइज करने के बाद तीन स्टाफ डॉक्टर टनल के अंदर रेंगकर तेंदुए तक पहुंचे और उसे काबू में कर किया। पिंजड़े में कैद कर टीम ने तेंदुए को लखनऊ जू पहुंचाया है। पकड़ा गया तेंदुआ व्यस्क नर है। रेस्क्यू के दौरान उसे हल्की चोटें भी आई हैं। उसका इलाज किया जा रहा है।
leopard
- फोटो : amar ujala
गोसाईगंज के मल्लूखेड़ा में टनल पास में छिपे बैठे तेंदुए को करीब 24 घंटे बाद वन विभाग की टीम पकड़ सकी। पूरे दिन-रात चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे उसे ट्रैंकुलाइज किया गया। फिर तीन स्टाफ डॉक्टर टनल के अंदर रेंगकर तेंदुए तक पहुंचे और उसे काबू में कर किया। पिंजड़े में कैद कर टीम ने तेंदुए को लखनऊ जू पहुंचाया है। पकड़ा गया तेंदुआ व्यस्क नर है। रेस्क्यू के दौरान उसे हल्की चोटें भी आई हैं। उसका इलाज किया जा रहा है।
leopard
- फोटो : amar ujala
सूचना पर पहुंची पुलिस-वन विभाग की टीम ने सुबह 11 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन देर रात तक भी तेंदुआ काबू में नहीं आ सका था। ‘टनल पास’ के मुहाने पर पिंजड़ा लगाने के साथ 10 मिनी ब्लास्ट के बाद भी तेंदुआ बाहर नहीं निकला। इस पर टीम ने देर रात ‘पास थ्रू प्लान’ पर काम शुरू किया पर सफलता न मिली। दो महकमों में सामंजस्य न होने से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरुआती घंटों में बेहद धीमा चला, जिसे शाम को पहुंचे जू के विशेषज्ञों ने तेजी दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
leopard
- फोटो : amar ujala
सुबह बीमारी की हालत में रेस्क्यू ऑपरेशन में नहीं पहुंच सके जू के उपनिदेशक और रेस्क्यू विशेषज्ञ डॉ. उत्कर्ष शाम करीब पौने पांच बजे पहुंचे। उन्होंने ‘टनल पास’ के भीतर झांकने के बाद पिंजड़े के मुहाने को सीधे टनल से जोड़कर 20 मिनट में जेसीबी हटवाई। तब कहीं जाकर डॉक्टरों, वन महकमे के अफसरों के साथ मीडियाकर्मियों ने भी कैमरे के फ्लैश चमका कर अंदर बैठे तेंदुए की पहली झलक देखी।
विज्ञापन
leopard
- फोटो : amar ujala
विशेषज्ञों ने पाया कि तेंदुआ टनल के दूसरे मुहाने पर 35-40 फीट पीछे दुबका बैठा है। टीम ने उसे निकालने को ब्लास्ट का सहारा लिया। 6 बजे से लेकर 45 मिनट तक टीम ने रह-रह कर 10 पटाखे दूसरे छोर से टनल में दगाए पर तेंदुए ने मूवमेंट तक नहीं की। बाद मे टनल में धुआं भरने के चलते टीम ने प्लान को ड्रॉप कर दिया।