लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता।इनमें आईपीएस अशोक कुमार वर्मा को सादगी के साथ योजनाबद्ध तरीके से क्राइम ब्रांच का महत्व बढ़ाने के लिए याद किया जाता है।
सादगी के साथ परदे के पीछे रहकर योजनाबद्ध काम करने वाले पुलिस अफसरों में अशोक कुमार वर्मा को लोग याद करते हैं। वर्ष 2015 में राजधानी की क्राइम ब्रांच पर आए दिन आरोपों के बीच अशोक कुमार वर्मा की अपर पुलिस अधीक्षक अपराध के पद पर तैनाती की गई। कार्यभार ग्रहण करते ही क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा जुआ, सट्टा और अन्य छुटपुट गुडवर्क पर अंकुश लगाते हुए बड़े अपराधों के खुलासे का टास्क सौंपा।
तत्कालीन पुलिस उपमहानिरीक्षक की इजाजत पर दागी पुलिसकर्मियों को क्राइम ब्रांच से बाहर का रास्ता दिखाने के साथ सर्विलांस सेल का पुनर्गठन किया। राजधानी के 41 इनामी अपराधियों की कुंडली तैयार कराई। पता चला कि संगीन वारदातों में फरार इनामी के मूल निवास के थाने की पुलिस को उसके आपराधिक इतिहास की खबर ही नहीं है। जिला अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो में भी सिर्फ हिरासत से फरार होने के मुकदमे मेें इनाम दर्शाया गया है। परदे के पीछे रहकर संगीन वारदातों के खुलासे में अहम भूमिका से क्राइम ब्रांच का महत्व बढ़ा। बरसों से क्राइम ब्रांच में तैनात पुलिसकर्मियों के तबादले से महकमे को बदनाम करने वाले खेल बंद होने लगे।
पुलिस अधिकारी के साथ कवि और लेखक अशोक कुमार वर्मा की सादगी के चलते लोग बेहिचक उनसे अपने आसपास के राज बता देते थे। पीजीआई थानाक्षेत्र में दरिंदगी के बाद अज्ञात युवती की हत्या की पड़ताल में उसके पर्स से मिली लिपस्टिक और पास में पड़े सिगरेट के टुकड़ों से युवती व कातिल की हैसियत का अनुमान लगाया।
कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस टीम को बिहार भेजा और नेपाल की युवती की शिनाख्त कराई। इसके बाद कातिल की तलाश शुरू हुई थी।