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अयोध्या को मलाल: भूमि पूजन में नहीं आ सके थे आंदोलन के प्रणेता, बोले थे- एक दिन पहले ही आ जाएंगे

Sun, 22 Aug 2021 12:25 PM IST
ishwar ashish धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 22 Aug 2021 12:25 PM IST
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Kalyan Singh could not come to Ayodhya for   bhoomi poojan.
- फोटो : amar ujala

‘अयोध्या जरूर आएंगे.. एक दिन पहले ही आ जाएंगे।' ये व्याकुलता भरे शब्द कल्याण सिंह ने साल भर एक अगस्त को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को खुद फोन कर कहे थे। इस पर चंपत राय ने उन्हें उनके स्वास्थ्य का हवाला देकर आने से मना करने की कोशिश की। पर, कल्याण सिंह राम मंदिर के भूमि पूजन में पांच अगस्त को आने के लिए आतुर थे। वहीं चंपत राय उनको समझाने में खुद को असहाय दिख रहे थे।



अब कल्याण सिंह के निधन से अयोध्या स्तब्ध है। लोग खुद को अनाथ महसूस कर रहे हैं। साधु-संतों को मलाल है कि राम मंदिर फैसले के बाद कल्याण सिंह अयोध्या नहीं आ पाए। आम लोग कहते हैं कि कल्याण सिंह के आने पर अयोध्या में सिर्फ दीप ही नहीं जलाते, बल्कि ढोल-नगाड़े बजाकर उत्सव मनता। पर, यह इच्छा अब सपना ही बनकर रह गई।

Kalyan Singh could not come to Ayodhya for   bhoomi poojan.
- फोटो : amar ujala

दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास कहते हैं कि कल्याण सिंह के इंतजार में आम लोग ही नहीं, बल्कि संत-महंत पलक-पावडे़ बिछाए बैठे थे। पर, उनके निधन की खबर से सबकी आंखें नम हैं। अनी अखाड़ा हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास कहते हैं कि कल्याण सिंह कलयुग में हनुमान के अवतार जैसे थे। उनके पराक्रम से आज अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है।

Kalyan Singh could not come to Ayodhya for   bhoomi poojan.
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह - फोटो : अमर उजाला

कल्याण सिंह मेरे बड़े भाई जैसे थे : कटियार
राम मंदिर के आंदोलन के नायकों में शामिल पूर्व राज्यसभा सांसद विनय कटियार ने कहा कि कल्याण सिंह को मैं अपना बड़ा भाई मानता था। हम दोनों की जोड़ी 90 के दशक में काफी मशहूर थी। हमलोगों ने साथ-साथ कई सभाएं भी कीं।

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Kalyan Singh could not come to Ayodhya for   bhoomi poojan.
- फोटो : पीटीआई

वर्ष 1992 में जब अयोध्या में लाखों की संख्या में कारसेवक जुटे थे, तब मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने मुझसे साफ कहा था कि हम निहत्थे कारसेवकों पर गोली नहीं चलाएंगे। सरकार अगर जाती है तो हमें कोई चिंता नहीं। जब छह दिसंबर को कार सेवा में ढांचा ढहा दिया गया तो कल्याण सिंह ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। उनका आत्मबल व समर्पण आज भी हमें याद है।

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पूर्व सांसद राम विलास वेदांती - फोटो : amar ujala
पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती बोले, यदि कल्याण सिंह न होते तो विवादित ढांचा ना टूटता। विवादित ढांचा टूटने के बाद ही राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ। आज राम मंदिर का निर्माण हो रहा है तो यह कल्याण सिंह के महान त्याग व समर्पण की देन है।
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