‘अयोध्या जरूर आएंगे.. एक दिन पहले ही आ जाएंगे।' ये व्याकुलता भरे शब्द कल्याण सिंह ने साल भर एक अगस्त को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को खुद फोन कर कहे थे। इस पर चंपत राय ने उन्हें उनके स्वास्थ्य का हवाला देकर आने से मना करने की कोशिश की। पर, कल्याण सिंह राम मंदिर के भूमि पूजन में पांच अगस्त को आने के लिए आतुर थे। वहीं चंपत राय उनको समझाने में खुद को असहाय दिख रहे थे।
अयोध्या को मलाल: भूमि पूजन में नहीं आ सके थे आंदोलन के प्रणेता, बोले थे- एक दिन पहले ही आ जाएंगे
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दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास कहते हैं कि कल्याण सिंह के इंतजार में आम लोग ही नहीं, बल्कि संत-महंत पलक-पावडे़ बिछाए बैठे थे। पर, उनके निधन की खबर से सबकी आंखें नम हैं। अनी अखाड़ा हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास कहते हैं कि कल्याण सिंह कलयुग में हनुमान के अवतार जैसे थे। उनके पराक्रम से आज अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है।
कल्याण सिंह मेरे बड़े भाई जैसे थे : कटियार
राम मंदिर के आंदोलन के नायकों में शामिल पूर्व राज्यसभा सांसद विनय कटियार ने कहा कि कल्याण सिंह को मैं अपना बड़ा भाई मानता था। हम दोनों की जोड़ी 90 के दशक में काफी मशहूर थी। हमलोगों ने साथ-साथ कई सभाएं भी कीं।
वर्ष 1992 में जब अयोध्या में लाखों की संख्या में कारसेवक जुटे थे, तब मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने मुझसे साफ कहा था कि हम निहत्थे कारसेवकों पर गोली नहीं चलाएंगे। सरकार अगर जाती है तो हमें कोई चिंता नहीं। जब छह दिसंबर को कार सेवा में ढांचा ढहा दिया गया तो कल्याण सिंह ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। उनका आत्मबल व समर्पण आज भी हमें याद है।