लखनऊ में गोमतीनगर के विश्वासखंड तीन निवासी मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर 30 वर्षीय विश्वजीत सिंह पुंडीर की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। स्टेट मेडिको लीगल के संयुक्त निदेशक डॉ. जी खान ने जांच के बाद राय दी है कि घटना वाली रात विश्वजीत अपने घर में प्रवेश के लिए बाउंड्रीवॉल फांद रहा था तभी ग्रिल का नुकीले सरिये उसके बायें हाथ के निचले हिस्से में घुस गया। इसी सरिये से विश्वजीत का हार्ट पंक्चर हो गया और अत्यधिक रक्तस्त्राव से मौत हो गई। गोमतीनगर थाने के इंस्पेक्टर राम सूरत सोनकर ने बताया कि डॉ. जी खान ने बीते दिनों अपनी रिपोर्ट पुलिस को सौंपी दी है। रिपोर्ट से साफ है कि विश्वजीत की हत्या नहीं की गई बल्कि वह हादसे का शिकार हुआ था। मालूम हो कि अमर उजाला की पड़ताल में भी हादसे की बात ही सामने आई थी।
मिडलैंड मैनेजर की मौतः नया खुलासा, ओह... तो घटना वाली रात घर पर नहीं था विश्वजीत
डॉ. खान ने आशंका जताई है कि घटना के वक्त विश्वजीत अपने घर से बाहर था। उनके मुताबिक आधी रात को वह घर लौटा और भीतर घुसने के लिए बाउंड्रीवॉल फांदने लगा। इस दौरान बाउंड्रीवॉल के ऊपरी हिस्से में लगी लोहे की ग्रिल के नुकीले सरिए उसके बायें हाथ के नीचे घुस गए। उसके शरीर में दो सरिये घुसने के घाव भी हैं। एक सरिया सीधे उसके हार्ट की तरफ गया, जिससे उसका हार्ट पंक्चर हो गया। पहले विश्वजीत के अपने कमरे की बालकनी से गिरकर चोटिल होने की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि, डॉ. खान ने इससे इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि विश्वजीत के शरीर का वजन 75 किलोग्राम से अधिक था। उसकी बालकनी के ठीक नीचे बाउंड्रीवॉल थी, जिसके आसपास पेड़ लगे थे। मौके पर एक पेड़ टूटा पाया गया था।
डॉ. खान का कहना है कि अगर वह बालकनी से नीचे गिरता तो पेड़ से टकराने के बावजूद ग्रिल के सरिये उसके शरीर को काफी नुकसान पहुंचाते। सरिया शरीर के आरपार भी हो सकते थे। उन्होंने तर्क दिया कि विश्वजीत अगर ऊपर से नीचे गिरता तो उसके हाथों में भी चोटें आतीं। डॉ. खान का कहना है कि किसी घटना-दुर्घटना अथवा हमले के वक्त हमारे हाथ डिफेंस का काम करते हैं। अगर विश्वजीत ऊपर से नीचे गिरता तो सबसे पहले वह अपने हाथ से खुद को बचाने का प्रयास करता, लेकिन उसके हाथों में कहीं भी चोट नहीं आई है। इससे साफ है कि वह बाउंड्रीवॉल फांदते वक्त नशे में होने की वजह से ग्रिल के सरियों पर फंसा और चोटिल हो गया।
जिस वक्त विश्वजीत को चोट लगी, वह अत्यधिक नशे की हालत में था। डॉ. खान का मानना है कि इसी वजह से वह चोट के दर्द को महसूस नहीं कर सका। विश्वजीत के कमरे से भी पुलिस को बीयर के कई खाली कैन और नशे की अन्य सामग्री मिली है जिससे उसके नशा करने की पुष्टि हो रही है।
फोरेंसिक एक्सपर्ट ने विश्वजीत के शरीर पर लगे दो गहरे घाव और ग्रिल के सरियों के बीच की दूरी का नाप लिया था। दोनों में ही दस सेंटीमीटर का अंतर था। इससे विश्वजीत पर किसी नुकीली वस्तु से हमला करने की आशंका समाप्त हो गई थी। यह स्पष्ट हो गया था कि विश्वजीत के शरीर पर लगी चोट ग्रिल के सरिए की ही है। फोरेंसिक विशेषज्ञों की यह राय पुलिस की विवेचना में महत्वपूर्ण साबित होगी।