बाबरी मस्जिद के सबसे बुजुर्ग मुद्दई हाशिम अंसारी का निधन बुधवार सुबह उनके आवास पर हो गया। हाशिम अयोध्या में मुस्लिमों ही नहीं हिंदुओं के भी चहेते थे। वह शांति चाहते थे और जीते जी इस विवाद पर फैसला भी। पढ़ें, 2014 हाशिम से की गई बातचीत के ये अंश...
2 of 6
हाशिम अंसारी
- फोटो : amar ujala
बाबरी मस्जिद मुकदमे के मुख्य मुद्दई हाशिम अंसारी फैसाला चाहते थे। दो साल पहले उन्होंने कहा था ‘जब तक एक भी मुसलमान रहेगा, तब तक बाबरी मस्जिद की पैरवी होती रहेगी। हम नहीं करेंगे तो 25 करोड़ मुसलमान पैरवी करेंगे।
3 of 6
हाशिम अंसारी
- फोटो : amar ujala
नेताओं के रवैये से बेहद नाराज मुद्दई हाशिम अंसारी ने कहा था, बाबरी मस्जिद कोई मेरी मिल्कियत नहीं है, जो मेरे बाद मेरा बेटा इस मुकदमे की पैरवी करे। हालांकि इस इंटरव्यू के बाद अगले साल उन्होंने ये भी कहा, हमारे जाने के बाद मुकदमे की पैरोकारी हमारा लड़का इकबाल करेगा लेकिन लाठी-डंडे से और न ही गंदी तकरीर से बल्कि सद्भावना व प्रेम से ही कर सकता है। अंसारी ने कहा, रामलला की दुर्दशा देखी नहीं जाती, उन्हें आजाद देखना चाहता हूं।
4 of 6
हाशिम अंसारी
- फोटो : amar ujala
उस वक्त 94 साल के हाशिम अंसारी ने नेताओं के रवैये की वजह से बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी से हटने का मन बना लिया था। उन्होंने कहा कि छह दिसंबर 1992 को लाखों की भीड़ ने फोर्स के साथ मिलकर हमारी बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया। क्या हुआ? रायबरेली में चल रहे मुकदमे में कोई दोषी नहीं मिला।
5 of 6
हाशिम अंसारी
- फोटो : amar ujala
बाबरी मस्जिद सारे हिंदुस्तान के मुसलमानों की मिल्कियत है। हाशिम और उनके परिवार की नहीं। एक भी मुसलमान हिंदुस्तान में है तो वह बाबरी मस्जिद चाहता है।