हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के आरोपी शेख अशफाक हुसैन और मोइनुद्दीन पठान ने मात्र डेढ़ मिनट में वारदात को अंजाम दिया था। लखनऊ पहुंचे दोनों आरोपियों ने शुक्रवार को पुलिस और अन्य एजेंसियों के सामने खुर्शेदबाग स्थित कमलेश के ऑफिस के भीतर हुए पल-पल के घटनाक्रम की पर्तें खोलीं। हत्यारों ने बताया कि डेढ़ मिनट में वारदात करके दोनों न सिर्फ इलाके से आराम से निकल गए बल्कि करीब एक घंटे के भीतर शहर भी छोड़ दिया था।
अशफाक ने रेता था कमलेश का गला, डेढ़ मिनट में वारदात कर भागे, हत्यारों से पूछताछ में खुलासा
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कमलेश ने उन्हें शुक्रवार सुबह मिलने के लिए कहा। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे अशफाक ने होटल से कमलेश को फोन कर मुलाकात की रूपरेखा तय की। इसके बाद दोनों मिठाई का डिब्बा लेकर कमलेश के खुर्शेदबाग स्थित आवास व ऑफिस पहुंच गए।
अशफाक ने बताया कि नीचे एक लड़का दिखा। उससे कहा कि कमलेश तिवारी से मिलने सूरत से आए हैं। लड़के को एक पर्ची पर गुजरात के वारछा से पार्टी के पदाधिकारी की बात लिखकर दी। लड़के ने पर्ची कमलेश को दी, जिसके बाद उन्होंने दोनों को ऊपर बुला लिया।
पहली बार में नहीं जुटा पाए हिम्मत
अशफाक ने पुलिस को बताया कि वह कमलेश के ऑफिस में वह करीब 20 मिनट रुके थे। इस दौरान वहां मौजूद कर्मचारी (सौराष्ट्रजीत सिंह) के सामने ही कमलेश उनसे बातचीत करते रहे। हालांकि, दोनों बेहद घबराए हुए थे। मोइनुद्दीन ने बताया कि इससे पहले उसने कभी चींटी तक नहीं मारी थी और सामने वह व्यक्ति बैठा था, जिसे जान से मारना था। यह सोचकर ही उसके हाथ-पैर ढीले हो रहे थे। अशफाक की हालत भी कुछ ऐसी ही थी।
उसने घबराहट दूर करने के लिए सिगरेट मांगी तो कमलेश ने सौराष्ट्रजीत से सिगरेट लेकर आने को कहा। सौराष्ट्रजीत के जाते ही दोनों को वह मौका मिल गया जिसकी तलाश कर रहे थे। जिस कमलेश तिवारी को हलाक करने का इरादा अशफाक करीब चार साल से मन में पाले थे, वह उसके सामने अकेला और निहत्था मौजूद था। दोनों के पास उन्हें ठिकाने लगाने का पूरा मौका और इंतजाम था, फिर भी वह हिम्मत नहीं जुटा सके।
दूसरी बार में किया हमला
करीब पांच मिनट बाद ही सौराष्ट्रजीत सिगरेट लेकर लौट आया। हत्यारों को अपनी साजिश फेल होती दिखी। वह कमलेश को बातचीत में उलझाकर फिर से सौराष्ट्रजीत के ऑफिस से जाने का इंतजार करने लगे। दो मिनट बाद ही कमलेश ने अपने कर्मचारी को गुटखा लाने की बात कहते हुए फिर से बाहर भेज दिया। दोनों यह दूसरा मौका नहीं चूकना चाहते थे। एक भी पल गंवाए बगैर अशफाक ‘कुछ निजी चर्चा’ करने की बात कहते हुए अपनी कुर्सी से उठा और कमलेश की तरफ बढ़ा। कमलेश उसके इरादे भांप नहीं पाए और अशफाक ने चाकू निकलकर उनकी गर्दन पर घोंप दिया। कमलेश चीखे और अशफाक से भिड़ गए। उसने चाकू रखकर उनकी गर्दन रेत दी।
छिनाझपटी में हुए घायल
छीना-झपटी के दौरान चाकू नीचे गिर गया, जिसे मोइनुद्दीन ने उठा लिया। तब तक अशफाक ने पिस्टल निकाल ली। इधर मोइनुद्दीन ने चाकू से ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए तो अशफाक ने कमलेश को गोली मार दी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक अशफाक की तरफ से चलाई गई गोली मोइनुद्दीन के हाथ की अंगुली में लगी। इस दौरान अशफाक का हाथ भी चाकू से चोटिल हो गया। पूरे घटनाक्रम में करीब डेढ़ मिनट का वक्त लगा। हत्या के बाद दोनों एक भी पल गंवाए बगैर भाग निकले।