लखनऊ के अमीनाबाद में आए भूकंप के कारण बुधवार को राजाजीपुरम की एक केमिकल फैक्टरी में धमाका हो गया। इससे रसायनों का रिसाव होने लगा और कर्मचारी चीखते हुए भागने लगे। आनन-फानन फैक्टरी सुपरवाइजर ने डीएम से मदद मांगी। रेडिएशन के खतरे को देखते हुए तुरंत सेना की क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) व क्विक रिएक्शन मेडिकल टीम (क्यूआरएमटी) ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। दरअसल, यह सब बुधवार को ‘मेडेक्स-2019’ के अंतर्गत उस अभ्यास सत्र का हिस्सा था जिसमें भारतीयों के साथ विदेशी सैन्य चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया।
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मेडेक्स-2019 : राजाजीपुरम की केमिकल फैक्टरी में धमाका, फैला रेडिएशन !, देखें तस्वीरें
Thu, 14 Mar 2019 04:36 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 14 Mar 2019 04:36 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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30 मिनट में सेट किया मेडिकल कैंप
क्यूआरएमटी ने मौके पर आधे घंटे में सेटअप तैयार कर डेढ से दो सौ घायलों के इलाज की व्यवस्था थी। एंबुलेंस से घायलों को फर्स्ट एड पोस्ट(एफएपी) वन व टू में ले जाया गया, रेडिएशन से बचाने के लिए दवाएं छिड़कीं गईं। राहत में जुटे जवानों के बूटों को शफल पिट से गुजारा गया। इसके अलावा अन्य घायलों को कई ट्रीटमेंट दिए गए।
क्यूआरएमटी ने मौके पर आधे घंटे में सेटअप तैयार कर डेढ से दो सौ घायलों के इलाज की व्यवस्था थी। एंबुलेंस से घायलों को फर्स्ट एड पोस्ट(एफएपी) वन व टू में ले जाया गया, रेडिएशन से बचाने के लिए दवाएं छिड़कीं गईं। राहत में जुटे जवानों के बूटों को शफल पिट से गुजारा गया। इसके अलावा अन्य घायलों को कई ट्रीटमेंट दिए गए।
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रेडिएशन से बचने के लिए नौ चरणों से गुजरे जवान
अगले चरण में सेना ने 25 मिनट में पर्सनल डिकंटेमिनेशन स्टेशन(पीडीएस) तैयार कर जवानों को रेडिएशन से बचाने के लिए नौ चरणों से गुजारा गया। उनके हथियारों की सफाई करनी पड़ी। कपड़ों को सावधानी से हटाया गया, ताकि रेडिएशन त्वचा तक न पहुंचे। फिर ओवरबूट व दस्तानों को नष्ट किया गया।
अगले चरण में सेना ने 25 मिनट में पर्सनल डिकंटेमिनेशन स्टेशन(पीडीएस) तैयार कर जवानों को रेडिएशन से बचाने के लिए नौ चरणों से गुजारा गया। उनके हथियारों की सफाई करनी पड़ी। कपड़ों को सावधानी से हटाया गया, ताकि रेडिएशन त्वचा तक न पहुंचे। फिर ओवरबूट व दस्तानों को नष्ट किया गया।
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शरीर की केमिकल एजेंट डिटेक्टर से जांच की गई। जवानों को साबुन के साथ सादे पानी से स्नान कराकर नए कपड़े व उपकरण दिए गए। एक घंटे में 55 लोगों को डिकंटेमिनेट किया जा सकता है।
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140 डिग्री पर खौलते पानी से धुली गईं गाड़ियां
तीसरे चरण में सेना ने व्हीकल डिकंटेमिनेशन स्टेशन(वीडीएस) तैयार कर फैक्टरी में वाहनों को धुला। रेडिएशन हटाने वाले पदार्थ को लगाकर तीस मिनट तक रिएक्शन स्टेशन पर छोड़ दिया गया। फिर 140 डिग्री सेल्सियस पर खौलते पानी से धुला गया।
तीसरे चरण में सेना ने व्हीकल डिकंटेमिनेशन स्टेशन(वीडीएस) तैयार कर फैक्टरी में वाहनों को धुला। रेडिएशन हटाने वाले पदार्थ को लगाकर तीस मिनट तक रिएक्शन स्टेशन पर छोड़ दिया गया। फिर 140 डिग्री सेल्सियस पर खौलते पानी से धुला गया।