लखनऊ निवासी 38 वर्षीय महिला करीब डेढ़ साल से इस खौफ के साथ जी रही थीं कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हो गया है। ब्रेस्ट पेन को लेकर वह तीन डॉक्टरों को दिखा चुकी थीं और हर बार दवाई बदल दी जाती, लेकिन दर्द नहीं गया। पूरा परिवार भी इसी सदमे में था। किसी की सलाह पर केजीएमयू के सर्जरी विभाग की ओपीडी में दिखाने पर पता चला कि महिला को कैंसर नहीं बल्कि पीएमएस यानी प्रीमेन्सट्रल सिंड्रोम है।
बेवजह न लीजिए टेंशन, हर ब्रेस्ट पेन नहीं होता कैंसर, बस इन बातों का रखें ध्यान
एसजीपीजीआई के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग की एक दिन की एक ओपीडी में ऐसे दिग्भ्रमित मरीजों की संख्या चार से पांच होती है। केजीएमयू के सर्जरी विभाग की एक दिन की एक ओपीडी में ऐसी 20 मरीज आती हैं। यही हाल लोहिया संस्थान के रेडिएशन आंकोलॉजी विभाग का है। रेडिएशन आंकोलॉजिस्ट बताती हैं कि मैं हर हफ्ते चार से पांच नए केस ऐसे देखती हूं। लखनऊ के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, छाती में होने वाला हर दर्द और हर गांठ कैंसर नहीं होती। 80 फीसदी मामलों में तो इस दर्द की दवा सही काउंसलिंग और संयमित जीवन शैली ही है।
पीजीआई के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग की प्रो. अंजलि मिश्रा के मुताबिक, छाती में होने वाले दर्द का कारण हार्मोनल साइकिल होता है। दरअसल लोग जानकारियों को लेकर भ्रमित हैं। सच्चाई यह है कि दस में से एक गांठ ही कैंसर की होती है। आम तौर पर स्तन कैंसर का दर्द हमेशा लास्ट स्टेज पर होता है और 40 साल की उम्र के बाद ब्रेस्ट कैंसर की आशंका ज्यादा होती है। जो केस आ रहे हैं, उन महिलाओं की उम्र 30 से 40 के बीच की है।
केजीएमयू में सर्जरी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गीतिका नंदा कहती हैं 70 से 80 फीसदी ब्रेस्ट पेन के मामले पीरियड्स आने से पहले ‘हार्मोनल डिस्टरबेंस’ और ‘हाइपर सेंसटिविटी’ के कारण होते हैं। कई मामलों में तो यह विटामिन डी की कमी या फिर प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन की वजह से होता है। मेरी एक दिन की ओपीडी में औसतन 200 मरीज आती हैं, जिसमें से 20-25 ऐसी होती हैं, जो ब्रेस्ट पेन को कैंसर मानकर आती हैं। इसमें से 60 फीसदी काउंसलिंग से ठीक हो जाती है।
इन बातों का रखें ध्यान
प्रो. अंजलि मिश्रा व डॉ. गीतिका नंदा के मुताबिक, कुछ बातों को हर युवती व परिवारीजनों को ध्यान रखना जरूरी है।
- दर्द को एकदम से नजरअंदाज करना ठीक नहीं, यह लगातार बना हुआ है तो एक बार डॉक्टर से जरूर बात कर लें।
- मेडिकल गाइडलाइन के मुताबिक, ब्रेस्ट पेन के मामले जनरल सर्जन या फिर किसी स्पेशलिस्ट डॉक्टर द्वारा देखे जाते हैं। आम तौर पर होता यह है कि महिलाएं स्तन में दर्द होने पर गाइनेकोलॉजिस्ट या फिर फिजिशियन के पास जाती हैं।
- 80 फीसदी मामलों में मरीजों को खानपान संतुलित करने की सलाह दी जाती है। फैटी डाइट कम करवाई जाती है।
- काउंसलिंग की जाती है कि दर्द से ध्यान हटाएं, जैसे हमारी दादी-नानी किया करती थीं। मेडिटेशन, योग, एक्सरसाइज करने की भी सलाह देते हैं।
- कुछ मामलों में कभी-कभी दवा की जरूरत होती है, तो उसे कुछ दवाओं से धीरे-धीरे खत्म करते हैं।
- कुछ लोग बिना डॉक्टरी सलाह के मेमोग्राम करा लेते हैं, उसमें निकलता कुछ नहीं। ऐसे में उनका कन्फ्यूजन और बढ़ जाता है।
- 40 वर्ष से कम उम्र की युवतियों में हम जब तक जरूरत न हो मेमोग्राम की सलाह नहीं देते। ज्यादा जरूरी होने पर अल्ट्रासाउंड करवा लेते हैं। जब तक डॉक्टर सलाह न दे तब तक इस तरह की जांचें न करवाएं।