उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 29,334 गणित विज्ञान के सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के मामले में हाईकोर्ट ने ऐसे अध्यापकों को चिह्नित कर हटाने का निर्देश दिया है, जिनका स्नातक में गणित या विज्ञान विषय नहीं था। तकनीकी डिग्रियां लेकर नौकरी कर रहे ऐसे कई अध्यापक इस आदेश की जद में आएंगे।
न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने प्रभात कुमार वर्मा सहित दर्जनों विशेष अपीलों को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया है। कोर्ट ने एनसीटीई द्वारा 11 फरवरी 2011 को जारी अधिसूचना के क्लॉज 5 (2) के तहत निर्धारित योग्यता के बगैर टीईटी पास कर नियुक्त हुए सहायक अध्यापकों की जांच कर सेवा से हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिया है।
खंडपीठ ने एकलपीठ के उस फैसले को संशोधित कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि याचीगण प्रत्यावेदन दें और बीएसए कार्रवाई करें। कोर्ट ने कहा कि याचियों को यह पता लगाने के लिए नहीं कहा जा सकता कि कौन अध्यापक साइंस या गणित का अध्यापक बनने की योग्यता रखता था और कौन नहीं। यह काम बीएसए द्वारा जांच और सुनवाई करके ही किया जा सकता है।
याचियों का कहना है कि कई ऐसे लोग टीईटी पास होकर सहायक अध्यापक नियुक्तहो गए हैं, जिन्होंने स्नातक में विज्ञान या गणित में से कोई एक विषय नहीं लिया था। 2011 के सर्कुलर में विज्ञान या गणित में स्नातक ही सहायक अध्यापक बन सकते हैं।
कोर्ट के इस फैसले से शिकायत मिलने पर हर बीएसए को इस बात की जांच कर कार्रवाई करनी होगी कि किस अध्यापक का स्नातक में विज्ञान या गणित विषय था और किसका नहीं।