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गिरधारी एनकाउंटर : पांच माह में पत्नी को छोड़ दिया था, दिल्ली जाता था गर्लफ्रेंड के पास, पढ़ें पूरी कहानी...
Tue, 16 Feb 2021 06:24 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
इंद्रभूषण दुबे, अमर उजाला, लखनऊ
इंद्रभूषण दुबे, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 16 Feb 2021 06:24 PM IST
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गिरधारी, एनकाउंटर स्थल पर मौजूद पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के चोलापुर स्थित लखनपुर निवासी गिरधारी उर्फ कन्हैया उर्फ डॉक्टर के अपराध जगत की कहानी काफी रोचक है। गिरधारी ने गंगा किनारे वाराणसी के जैतपुरा थाने में पहली वारदात फरवरी 2001 में की थी। इसके बाद वह एक के बाद एक वारदात को अंजाम देता गया। आसपास के एक दर्जन से अधिक जिलों में उसका खौफ था। उसका आपराधिक सफर अंत लखनऊ में गोमती किनारे फरवरी 2021 में पुलिस से हुई मुठभेड़ में हमेशा के लिए खत्म हो गया। पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की हत्या के मुख्य शूटर गिरधारी ने जुर्म की दुनिया में फरवरी 2001 में कदम रखा था। वाराणसी के जैतपुरा थाने में गोली मारकर लूट की थी। उस पर हत्या का पहला केस 2005 में जौनपुर के केराकत थाने में दर्ज हुआ। गिरधारी के खिलाफ वाराणसी, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, मुंबई और लखनऊ में करीब 25 मुकदमे दर्ज हुए। इसमें आठ हत्या व हत्या की साजिश रचने के अलावा रंगदारी व हत्या के प्रयास के केस हैं। इसमें बसपा केपूर्व विधायक सर्वेश सिंह उर्फ सीपू की हत्या भी शामिल हैं। इसी हत्याकांड की गवाही को लेकर कभी एक साथ सुपारी पर हत्या करने वाले गिरधारी, कुंटू व अजीत के बीच अदावत हो गई थी। पुलिस के रिकॉर्ड में गिरधारी का आपराधिक इतिहास गंगा के किनारे से शुरू हुआ था जो लखनऊ में गोमती के किनारे छह जनवरी को अजीत की हत्या के बाद खात्मे की ओर चल पड़ा। 13 फरवरी को पुलिस कस्टडी रिमांड पर आने केबाद गिरधारी 14 फरवरी की देर रात असलहा बरामद कराने जाते समय उसने भागने की कोशिश की जिसमें वह पुलिस से मुठभेड़ के दौरान मारा गया।
खरगापुर रेलवे लाइन के पास छीनी दरोगा की पिस्तौल
एनकाउंटर स्थल पर मौजूद पुलिस।
- फोटो : amar ujala
अजीत हत्याकांड में मुख्य शूटर गिरधारी ने खरगापुर रेलवे लाइन के पास अचानक दरोगा के चेहरे पर वार करके उसकी पिस्तौल छीन ली। खून से लथपथ दरोगा के संभलने से पहले गिरधारी ने उनकी पिस्तौल छीन ली और रेलवे लाइन किनारे झाड़ियां में छिपकर भागने लगा। इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सिंह ने कंट्रोल रूम को सूचना देकर अतिरिक्त पुलिस बल मांगा। इस दौरान एसएसआई अनिल सिंह ने उसे चेतावनी देकर रोका तो गिरधारी ने फायर झोंक दिया। गोली अनिल के दाहिने बाजू पर लगी। इस पर इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सिंह ने जवाबी फायर किया तो गिरधारी ने भी गोली चलाई, जो इंस्पेक्टर की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी। जवाबी फायरिंग में गंभीर रूप से जख्मी गिरधारी को लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। मुठभेड़ की जानकारी देते हुए संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध नीलाब्जा चौधरी ने बताया कि देर शाम पोस्टमार्टम में गिरधारी को दो गोली लगने की पुष्टि हुई। एक गोली बाएं तरफ सीने में और दूसरी गोली बाएं तरफ जांघ में लगी। मुठभेड़ में घायल दोनों दरोगा को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना पर जेसीपी अपराध, डीसीपी पूर्वी संजीव सुमन, एसीपी विभूतिखंड प्रवीण मलिक सहित कई अधिकारी पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए।
गैंगवार की रकम अंकुर के खाते में जमा कराया
गिरधारी।
- फोटो : अमर उजाला
एनकाउंटर के पहले पूछताछ में गिरधारी ने कुबूल किया था कि उसे गैंगवार के लिए जो भी रकम मिली थी। उसे अंकुर के खाते में जमा कराया था। इसके लिये आर्थिक मदद भी कुंटू व अखंड के कहने पर मिलती रही। कुंटू के एक दोस्त ने अंकुर व बंधन के खाते में हत्या से पहले लाखों रुपये जमा कराये थे। जिसे दोनों ने निकाल कर लोगाें को जरूतर के मुताबिक देते रहे। पूछताछ में पुलिस को शूटर रवि यादव के बारे में पूरी जानकारी मिली। रवि आजमगढ़ के ओच्छवां गांव का रहने वाला है। उद्यम सिंह का वह करीबी बताया जाता है। साथ ही उसका संबंध सुनील राठी गिरोह से भी रहे है। पुलिस का कहना है कि रवि यादव, राजेश तोमर व मुस्तफा कोर्ट में समर्पण करने की फिराक में है।
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जुर्म की दुनिया में गिरधारी के थे कई नाम
अजीत सिंह (बायें) व घटनास्थल पर तैनात पुलिसकर्मी।
- फोटो : amar ujala
पुलिस के मुताबिक गिरधारी का असली नाम कन्हैया विश्वकर्मा था। लेकिन जुर्म की दुनिया में आने केबाद कई नए नाम मिलते गये। इसमें गिरधारी, डॉक्टर, लोहार, टग्गर, डीएम, रॉबिनहुड जैसे नाम शामिल हैं। उसे अपराध की दुनिया का डॉक्टर ऑॅफ डेथ कहा जाता था। लोग बताते हैं कि वह शरीर केउसी हिस्से पर गोली मारता था। जहां लगने के तत्काल बाद मौत हो जाए। बचने का कोई मौका न मिले। देश के12 जिलों के अपराध रजिस्टर में गिरधारी का नाम दर्ज हैं।
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सत्ताधारी नेताओं के करीब रहता था
अजीत सिंह मर्डर केस
- फोटो : self
गिरधारी काफी तेज दिमाग का था। वह समय के साथ अपनी आस्था भी बदल देता था। प्रदेश में जिसकी सरकार रहती थी। उसके मजबूत नेता के करीब पहुंच जाता था। 2005 में जौनपुर में चेयरमैन विजय गुप्ता की हत्या के बाद राजनैतिक दल के बाहुबली नेता का खास बन गया। यह करीबी काफी लंबे समय तक चलती रही। 2007 में प्रदेश में सरकार बसपा की बनी तो आजमगढ़ के विधायक सर्वेश सिंह का करीबी बन गया। इसके बाद 2012 में सरकार बदली तो उसने दूसरे दल का दामन थाम लिया। जिसके बाद बसपा विधायक से दुश्मनी हो गई। लोग बताते हैं कि गिरधारी अपना वेशभूषा भी बदलने में माहिर था। 2005 में गिरधारी लोहार ने जौनपुर में चेयरमैन के भाई विजय गुप्ता की हत्या की थी। इसके बाद 2008 में मऊ के घोसी में नंदू सिंह की हत्या, 2011 में आजमगढ़ के जीयनपुर में डमरू सिंह की हत्या, 2010 में मऊ के कोतवाली इलाके में सुनील सिंह की हत्या, 2013 में बीएसपी विधायक सर्वेश सिंह उर्फ सीपू की हत्या, 2019 में वाराणसी में नीतेश सिंह की हत्या और 2020 में लखनऊ में पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह हत्या कर दी थी।