(बहराइच)। देश की आजादी के लिए एक सिपाही का परिवार मुफलिसी में जिंदगी गुजार रहा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उसके बेटे का वर्षों पूर्व निधन हो गया। घर में निशक्त पुत्र वधू भीख मांगकर जीवन यापन करने को मजबूर है। 17 वर्षीय बेटा भी मजदूरी करके परिवार के खर्च में मदद करता है।
देश की आजादी में बहराइच के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। लेकिन सेनानियों के परिवार गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं। उनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. बरातीलाल पटवा का भी परिवार है। महात्मा गांधी के नमक आंदोलन से आजादी की लड़ाई में कूदने वाले बरातीलाल पटवा ने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए तीन बार जेल की यात्रा की। वर्ष 1995 में उनका निधन हो गया। घर में बेटा राम कुमार, पुत्र वधू राजकुमारी व पौत्र राधे था। उनमें रामकुमार का वर्ष 2001 में बीमारी से निधन हो गया।
अब घर में राजकुमारी व 17 वर्षीय राधे ही है। राजकुमारी दोनों पैर से निशक्त है। घर का खर्च चलाने के लिए उसे नवाबगंज बाजार की सड़कों पर भीख मांगनी पड़ रही है। पुत्र राधे क्षेत्र में मेहनत मजदूरी कर घर का खर्च चलाने में मां की मदद करता है। राजकुमारी से परिवार के अतीत के बारे में पूछा गया तो वह फफक पड़ीं।
बोलीं कि ससुर को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का प्रमाण पत्र मिला है। वह कहीं रखा है। मिल नहीं रहा है। अक्षम होने के कारण वह चल भी नहीं सकतीं। उन्होंने कहा कि बेटा राधे मजदूरी करने पास के गांव में गया है। देर रात तक लौटेगा। राजकुमारी ने कहा कि कई बार उन्होंने अधिकारियों को पत्र लिखा लेकिन कोई मदद नहीं मिली। ऐसे में भीख मांग कर किसी तरह गुजर बसर कर रही हूं।
हर संभव मदद होगी
नानापारा एसडीएम ने मामले के संज्ञान में आने पर कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के पुत्र, पौत्र और पुत्र वधू की मदद हो सकती है लेकिन इसके लिए आरक्षण निर्धारित है। दावा करने पर आरक्षण के तहत लाभ मिलेगा। अलग से कोई बजट नहीं होता। सेनानी की बहू के भीख मांगने की जानकारी नहीं थी। जांच कराऊंगा। हर संभव मदद की जाएगी।