ढांचा ध्वंस से पहले अटल का वो भाषण जो इतिहास बन गया, कहा था... अयोध्या में नुकीले पत्थर तो हटाने ही होंगे

अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 01 Oct 2020 12:48 PM IST
अटल बिहारी वाजपेयी
1 of 6
विज्ञापन
विश्व हिंदू परिषद और श्रीराम जन्मभूमि न्यास तथा मंदिर निर्माण समिति 6 दिसंबर 1992 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए दूसरी कारसेवा की घोषणा कर चुकी थी। इसमें शामिल होने के लिए विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी के साथ रथ पर सवार होकर 5 दिसंबर 1992 को अयोध्या जा रहे थे। रास्ते में उनका पड़ाव लखनऊ था और यहां से सांसद के नाते अटल बिहारी वाजेपयी स्वागत के लिए अमीनाबाद के झंडा वाले पार्क की सभा में मंच पर प्रमोद महाजन के साथ मौजूद थे।

 
अटल बिहारी वाजपेयी
2 of 6
इस दौरान अमीनाबाद में जबरदस्त भीड़ थी। क्योंकि इस बार चर्चा थी कि आमतौर पर अयोध्या मामले पर दूरी बनाए रखने वाले भाजपा के उदारवादी चेहरा अटल भी इस बार कारसेवा में शामिल होने अयोध्या जा रहे हैं। एक बात और, कल्याण सिंह की सरकार ने चूंकि ढांचा की सुरक्षा करने और कोई नया निर्माण न करने का हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दे रखा था इसलिए अटल के भाषण को लेकर लोगों में और भी अधिक उत्सकुता थी कि वह सरकार और साख के बीच किसे प्राथमकिता देंगे।
 
विज्ञापन
अटल बिहारी वायपेयी
3 of 6
इधर, आडवाणी और जोशी के रथ के पहुंचने में वक्त लग रहा था। शाम 7.30 बजे तो एक पर्ची अटल के पास आई। इसे देखने के बाद उनके चेहरे के भाव बदल गए। पर, आगे बोले तो उनके हर वाक्य से यह साफ होता गया कि क्या होने जा रहा है। हालांकि यह समझना मुश्किल था कि उन्होंने ऐसे शब्दों और वाक्यों का प्रयोग क्यों और कैसे किया, लेकिन उन्होंने संकेतों में कह बहुत कुछ दिया। अटल बोले, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आप लोग वहां भजन-कीर्तन कर सकते हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी
4 of 6
अब भजन अकेले तो होता नहीं। सामूहिक होता है। कीर्तन के लिए और भी ज्यादा लोगों की जरूरत होती है। फिर भजन-कीर्तन खड़े होकर तो होगा नहीं। कब तक खड़े रहेंगे। जाहिर है कि बैठने की जगह बनानी होगी। भगवान की सेवा के लिए रामभक्त अयोध्या जा तो रहे हैं तो नुकीले पत्थरों व ईंटों और झाड़-झंखाड़ के बीच थोड़े न बैठेंगे। वहां के नुकीले पत्थरों को हटाना पड़ेगा। जमीन समतल करनी होगी। यज्ञ का आयोजन होगा तो कुछ निर्माण भी होगा। कम से कम वेदी तो बनानी ही पड़ेगी। मैं नहीं जानता कि कल वहां क्या होगा। अटल अपनी रौ में कह रहे थे,  इस बार मैं भी अयोध्या जाकर कारसेवा में शामिल होना चाहता था, लेकिन नेतृत्व ने कहा, दिल्ली वापस जाओ। वहां तुम्हारी ज्यादा जरूरत है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
अटल बिहारी वायपेयी
5 of 6
मैं आदेश का पालन करूंगा। शरीर से मैं दिल्ली में रहूंगा, लेकिन आत्मा व मन अयोध्या में कारसेवकों के बीच। रामजी ने शायद मेरे लिए अन्य कुछ कार्य निर्धारित कर दिए हैं। कारसेवक कल शांतिपूर्वक कारसेवा करेंगे। वहां बैठकर राम नाम का कीर्तन करेंगे। न्यायालय के निर्देशों का पूरा सम्मान किया जाएगा।


 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00