सरयू (घाघरा) में छोड़े गए विभिन्न पहाड़ी नालों व बैराजों के पानी से घाघरा का जलस्तर इस वर्ष के सबसे शीर्ष ऊंचाई पर पहुंच गया है। देर रात तक घाघरा में पानी का बढ़ना तेजी से जारी रहा। घाघरा का पानी गुरुवार की देर शाम तक 80 सेंटीमीटर के ऊपर पहुंच चुका है। जिससे नदी और बांध के बीच टकराव शुरू हो गया। नदी की कटान से बांध को बचाने के लिए लगाई गई परखोपाइन पानी में डूब गई। नदी का पानी मैदानी इलाकों में तेजी से भरना शुरू हो गया है।
गोंडा: खतरे के निशान से ऊपर बह रही सरयू, सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन कर रहे ग्रामीण, कई गांव डूबे
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घाघरा नदी अपने उफान पर आने के साथ-साथ सीधे बांध से टकराने लगी है। ग्राम बांसगांव के पास नदी का जलस्तर जितना ऊंचे जा रहा है उसके हिसाब से बनाए गए स्पर डूबने लगे हैं। प्रशासन ने बांध के आसपास के गांवों को खाली कराने का काम शुरू कर दिया है। सिंचाई विभाग द्वारा किये जा रहे दावे के अनुसार इस बार घाघरा नदी एल्गिन-चरसड़ी तटबंध को कोई हानि नहीं पहुंचा पायेगी।
गुरुवार की सुबह 6 बजे एल्गिन ब्रिज पर ली गई माप के अनुसार नदी का जल स्तर 106.626 रहा। जो 10 बजे बढ़कर 106.716 व दिन में 12 बजे 106.776 हो गया। जो देर शाम को 106.816 पर पहुंच गया। इसके साथ ही पानी के बढ़ने का सिलसिला तेज चल रहा है। जिससे नदी से निकल कर बाढ़ का पानी नाले के रास्ते ग्राम नकहरा के मजरा पुहिल पुरवा, मोछारन पुरवा व राधे पुरवा के चारों तरफ भर गया है। वहीं, माझा रॉयपुर, परसाबल, नैपुरा पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। बांध से वापस अपने घर लौटने वाले लोग पुन: अपने परिवार के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंच रहे हैं।
एसडीएम ज्ञानचन्द्र गुप्ता, तहसीलदार बृजमोहन व राजस्व कर्मचारी गांव पहुंचे। जहां एनाउंसमेंट व डुग्गी पिटवा कर लोगों को सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने के लिए प्रेरित करते रहे। बाढ़ चौकी गौरा सिंहपुर, पालहापुर एवं प्राथमिक विद्यालय नकहरा को शरण स्थल के रूप में बनाया गया है। जहां गांव के लोग अपने मवेशियों को लेकर आने लगे हैं। इसके अलावा प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर वहां राजस्व कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य विभाग के कर्मचारियों को भी तैनात कर दिया है।
एसडीएम का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रहने के लिए कहा गया है और लगातार बांध पर निगरानी कराई जा रही है। एसडीएम ज्ञानचन्द गुप्ता ने बताया कि नदी का जल स्तर बढ़ रहा है। जिसे देखते हुए क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों को किसी तरह की कोई समस्या नहीं होने दी जायेगी। उन्होंने बताया कि बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी पूर्व में ही की जा चुकी है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि जल स्तर बढ़ने घटने से बांध को कोई खतरा नही है।
वहीं, बलरामपुर में नेपाली पानी के चलते एक बार फिर राप्ती नदी का जलस्तर बुधवार को चेतावनी बिंदु 103.620 मीटर से 48 सेमी. ऊपर 104.100 मीटर पर पहुंच गया है। नदी की कटान के चलते महरी व लालाजोत आदि गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। गैसड़ी विधायक ने बाढ़ खंड के कार्यों पर कड़ी आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि राप्ती का जलस्तर बढ़ने से महरी गांव के पास भारी कटान हो रही है। गांव की सुरक्षा के लिए बनाया गया बांध क्षतिग्रस्त है। बांध की मरम्मत और कटान रोकने के उपाय नहीं किए गए तो गांव ही तबाह हो सकता है।
स्थानीय थाना क्षेत्र के खरझार पहाड़ी नाले में गुरुवार को उफान आ गया। पहाड़ी नाले में बाढ़ आने से 15 गांव जलमग्न हो गए है। बाढ़ के पानी से घरों में रखा राशन व अन्य सामान बर्बाद हो गया है। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तुलसीपुर एसडीएम ने टीम भेजने का आश्वासन दिया है। थाना महराजगंज तराई क्षेत्र के बाढ़ पीड़ित पवन कुमार, प्रधान यादव, जीवनलाल, जय प्रकाश, रामजी, नुरूल, सलाम व बड़का आदि ने बताया कि गुरुवार की भोर में अचानक खरझार पहाड़ी नाले में बाढ़ आ गई। पहाड़ी नाले का पानी क्षेत्र के 15 गांवों में भर गया।
शांतिनगर, रामगढ़ मैटहवा, साहेबनगर, विजयीडीह, लहेरी, औरहिया, लोहेपनिया, सहिबिनिया, जगरामपुरवा, हरिहरनगर, दांदव, सुगानगर, बल्दीडीह, लालबोझी व रूपनगर आदि गांवों में आवागमन प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों के घरों में रखा राशन व अन्य सामान बाढ़ के पानी से बर्बाद हो गया है। बाढ़ पीड़ितों ने शासन-प्रशासन से क्षति का आकलन कराकर मदद करने की गुहार लगाई है। तुलसीपुर एसडीएम विनोद सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही मौके पर टीम भेजी गई है। हल्का लेखपालों को बाढ़ प्रभावित गांवों में तैनात कर दिया गया है।