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एक्सीडेंट में सीने से आर-पार हो गया था लोहे का एंगल, डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी, तस्वीरें

Sun, 10 Sep 2017 09:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 10 Sep 2017 09:28 AM IST
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doctor's of KGMU saved the life of a man who met to an accident.

केजीएमयू के डॉक्टरों ने कार हादसे में सीने के आर-पार हुए लोहे के एंगल को बाहर निकाल कर मरीज को नई जिंदगी दी। एंगल घुसने से उसका फेफड़ा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। खून का रिसाव लगाता हो रहा था। डॉक्टरों की टीम ने साढ़े तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद एंगल को बाहर निकाला। नौ दिनों तक डॉक्टरों की देखरेख में मरीज स्वस्थ हो गया है। उसकी छुट्टी भी कर दी गई।



मालूम हो कि 27 अगस्त को सड़क हादसे के दौरान कार से लखनऊ आ रहे गोंडा निवासी समीर की छाती में लोहे का एंगल सीने के आर-पार हो गया था। हादसा रात करीब 9 बजे गुडंबा कुर्सी रोड पर हुआ था। इसमें एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बुरी तरह से घायल समीर को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। एंगल घुसने से मरीज सीधा लेट भी नहीं पा रहा था। ऐसे में मरीज की सर्जरी करना चुनौती बन गया।

doctor's of KGMU saved the life of a man who met to an accident.
छाती में जम गया था एक लीटर खून
केजीएमयू के प्रो. संदीप तिवारी ने छह लोगों की टीम संग ऑपरेशन शुरू किया। मरीज की छाती में करीब एक लीटर जमे खून को साफ किया गया। लोहे के एंगल को फेफ ड़े से हटाकर उसे सील किया गया। करीब साढ़े तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद एंगल निकाला जा सका।

यहां पढ़ें पूरी खबर- भीषण हादसे में दोस्तों के सीने के आर-पार हो गया लोहे का एंगल, एक की दर्दनाक मौत
doctor's of KGMU saved the life of a man who met to an accident.

बेहोशी देने में आई दिक्कत
प्रो. संदीप तिवारी ने बताया कि ऑपरेशन कक्ष में मरीज को बेहोशी देने में काफी कठिनाई हुई। लोहे का एंगल आरपार होने से मरीज सीधे नहीं लेट पा रहा था। ऐसी स्थिति में बाई तरफ से बेहोशी की नली डाली गई। इसके बाद दाहिने तरफ की छाती को खोलकर ऑपरेशन किया गया। एक रक्त कोशिका से लगातार खून बहने से ऑपरेशन में दिक्कत आई थी। (प्रो. संदीप तस्वीर में)

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बहुत जटिल थी सर्जरी
प्रो. संदीप ने बताया मरीज की सर्जरी बहुत जटिल थी। छाती से आर-पार एंगल होने से अधिक खून बहने से मरीज को सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। मरीज का ब्लड प्रेशर भी कम होता जा रहा था। ऐसे में छह बोतल खून व ऑक्सीजन लगाकर तत्काल जटिल सर्जरी की गई। ऑपरेशन बाद मरीज का ब्लड प्रेशर नियंत्रण में आने बाद मरीज को बेहोशी से बाहर किया गया। (हादसे का एक दृश्य।)

डॉक्टरों को कहा-शुक्रिया
मरीज अपने बेहतर इलाज के लिए शनिवार को डाक्टरों का शुक्रिया अदा करने आया था। मरीज को नई जिंदगी देने वाले डॉक्टरों में प्रो. संदीप तिवारी, डॉ. समीर मिश्रा, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. अनुराग, डॉ. अजय व डॉ. निधी शामिल रहीं।

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