विकास में तो शहरों से भी आगे है मोदी का जयापुर गांव
अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखने वाले 84 वर्षीय मुखई और उनकी 82 साल की पत्नी सरस्वती देवी की आंखों में चमक है। पुरखों के जमाने से लेकर अब तक वे जयापुर में झुग्गी-झोपड़ियों में रहते आए हैं। अब उन्हें ‘मोदी के अटल नगर’ में आवास मिला है। सरस्वती नए घर को लेकर बेहद उत्साहित हैं। आवास का पूजन और उद्घाटन होने तक वह नल का पानी भी नहीं पी रही हैं।
विकास में तो शहरों से भी आगे है मोदी का जयापुर गांव
कहती हैं- ‘पुरखों के जमाने से यहीं जंगल में रह रहे थे। बिजली के बारे में हमने कभी सोचा नहीं था। पानी भी बहुत दूर से लाना पड़ता था’। चमक अकेले सरस्वती या मुखई के चेहरे पर नहीं है। जयापुर गांव के ज्यादातर चेहरों पर खुशी है।
विकास में तो शहरों से भी आगे है मोदी का जयापुर गांव
वाराणसी से करीब 25 किमी दूर इलाहाबाद रोड पर मुख्य मार्ग से करीब आठ किमी अंदर बसा जयापुर सात महीने पहले तक आम गांव ही था। बिजली, पानी की किल्लत, सड़कों का अभाव...। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल सात नवंबर को अपने संसदीय क्षेत्र के इस गांव को गोद लिया तो पूरे देश की नजर इस पर पड़ी।
विकास में तो शहरों से भी आगे है मोदी का जयापुर गांव
दो-ढाई महीने तक कोई काम नहीं हुआ तो लोगों में मायूसी दिखी पर पिछले चार महीनों में गांव की पूरी सूरत बदल गई। गुजरात के उद्योगपति, कुछ कंपनियां और बैंक विकास के लिए आगे आ गए। सड़क, शौचालय, कन्या पाठशाला और ट्यूबवेल के बोरिंग का काम तेजी से चल पड़ा।
विकास में तो शहरों से भी आगे है मोदी का जयापुर गांव
छोटे से घर से नहीं हटती नजर
जयापुर में पहुंचते ही छोटे-छोटे 14 मकान ध्यान खींचते हैं। खूबसूरत एंट्री गेट-जिस पर लिखा है ‘मोदी जी का अटल नगर’। पोर्च, रोड और सामने मंदिर और सुंदर बगीचा...। शौचालय, बॉथरूम और किचन के साथ ही एक बड़े कमरे वाला घर...। यह मकान बनाए गए हैं अनुसूचित जनजाति में आने वाले मुसहर परिवारों के लिए। एक परिवार की जरूरत की हर चीजों का इनमें खयाल रखा गया है।