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कौन सा पक्षी करता है सबसे अच्छी मिमिक्री... पढ़ें- रोचक सवालों पर बच्चों के सटीक जवाब

Sun, 12 Nov 2017 11:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 12 Nov 2017 11:08 AM IST
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Crow care day in zoo in Lucknow.

अमर उजाला व दाना-पानी संस्था की ओर से लखनऊ जू की बारादरी में शनिवार को ‘केयर क्रो डे’ का आयोजन किया गया, जहां विशेषज्ञों ने बच्चों को रोचक कहानियों व मखमली गीतों से प्रकृति की अहमियत समझाई। बताया कि प्रकृति से करीबी और संरक्षण क्यों जरूरी है। इसके बाद बच्चों ने चिड़ियाघर का भ्रमण भी किया, जहां उन्हें वन्यजीवों से जुड़ी जानकारियां दी गईं।



जू की बारादरी में आयोजित कार्यक्रम में साइंटून के जनक वैज्ञानिक प्रदीप श्रीवास्तव ने बच्चों से पूछा कि बताइए, कौन सा पक्षी सबसे अच्छी मिमिक्री करता है तो बच्चों ने तपाक से जवाब दिया तोता। उन्होंने आगे बताया कि बुलेट ट्रेन और पक्षियों के बीच गहरा संबंध है। एक चिड़िया साइबेरिया से अफ्रीका तक का सफर तय करती है और फिर वापस लौटती है। कुल 16000 किलोमीटर की यात्रा करती है। यह चिड़िया पेट्रोल से नहीं चलती, बल्कि खाने से चलती है। इसलिए हमें ऐसा माहौल बनाकर रखना होगा, जिससे पक्षियों को खाने-पीने का संकट बिलकुल भी पैदा नहीं होना चाहिए।

Crow care day in zoo in Lucknow.

वहीं उप्र हिंदी संस्थान के साहित्यकार मनीष शुक्ला ने बताया कि जैसे-जैसे आप बड़े होते जाते हैं, आपमें संवेदनाएं बढ़ती जाती हैं। उन्होंने पूछा कि आप लोगों में से कितनों ने कुत्ता पाला है। दरअसल, पशुओं में भी वही जीव होता है, जो हममें है। इसलिए उनके प्रति प्रति आपका प्यार धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।

बच्चों को पशु-पक्षियों के प्रति संवदेनशील बनाने में परिजनों व स्कूल की अहम भूमिका है। वहीं विक्त्रस्मांशु ठाकुर ने कहा कि संवेदनाओं की कमी एक बड़ी समस्या है। इसकी कमी होने के कारण ही लोग खुदकुशी जैसा कदम उठाने से भी गुरेज नहीं करते। जरूरत है संवेदनाएं बनी रहीं और कहानियों के जरिये यह काम आसानी से किया जा सकता है।

मसलन, जो बच्चा नेचर की केयर करता है, वह केयर क्रो है। वही केयर क्रो, जो खेत में खड़ा होकर फसल की रखवाली करता है। सेवानिवृत्त चीफ कन्जर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट मोहम्मद एहसान ने बच्चों से कहा कि यहां तीन से चार घंटे बिताएंगे। इस दौरान आप बताइए क्या-क्या नहीं करेंगे। बच्चों ने बताया कि जानवरों को परेशान नहीं करेंगे और चिड़ियाघर की किसी प्रॉपर्टी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। पानी की बर्बादी नहीं करेंगे।

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नॉलेज के पीछे भागो, नौकरी के नहीं
मनोवैज्ञानिक डॉ. सिंधुजा मिश्रा ने बच्चों को समझाया कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है। उन्होंने बच्चों से यह भी पूछा कि शिक्षा का उद्देश्य क्या है? समाज से गरीबी को मिटाना। पैरेंट्स आपके लिए काफी कुछ करते हैं, इसलिए आपकी भी कुछ जिम्मेदारी बनती है, उनके प्रति। नॉलेज के पीछे भागे, नौकरी के नहीं।

मगरमच्छ और कौवे की कहानी बच्चों को भायी
कहानीकार आयशा सिद्दीकी ने बच्चों को पर्यावरण से संबंधित कहानी सुनाई और पशुओं के प्रति संवेदनाएं पैदा करने का संदेश दिया। उन्होंने उन्होंने मगरमच्छ और कौवे की रोचक कहानी सुनाई। जो बच्चों को बहुत पसंद आई। रुपाली चंद्रा ने भी बच्चों को कहानी सुनाई और चिड़ियाघर के डॉ. उत्कर्ष शुक्ल ने बताया कि हर जानवर का किस्सा होता है, कहानी होती है, इसलिए जब जू घूमेंगे तो उनके बारे में जानकारी जरूर लीजिएगा।

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नाना तेरी मोरनी को मोर ले गया...
गायिका कुसुम वर्मा ने बच्चों को प्रकृति का मर्म गीतों के जरिए समझाया। उन्होंने कहा कि हम इस वक्त नवाब वाजिद अली शाह जूलॉजिकल गार्डन में हैं। यहां आपको पशु-पक्षी मिलेंगे। इसलिए हमारा सबसे पहला काम होना चाहिए, इन्हें बचाना।

इसके बाद उन्होंने बच्चों को गायन के बुलाया। बच्चों ने नानी तेरी मोरनी को मोर ले गया, बाकी जो बचा था वह काला चोर ले गया और मैंने कहा फूलों से तो खिल खिलाकर हंस दिए... गीत सुनाए।

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