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वैलेंटाइन वीक स्पेशल: जाति के बंधन तोड़ सड़क पर किया प्रपोज, घुटने पर आए और बोले...
Fri, 08 Feb 2019 03:26 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 08 Feb 2019 03:26 PM IST
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- फोटो : amar ujala
रोज डे पर बृहस्पतिवार को गुलाब का फूल देकर दोस्ती या मोहब्बत का इजहार किया हो या न किया हो, लेकिन आज प्रपोज-डे पर आप अपनी बात आगे बढ़ा सकते हैं। किसी को दोस्त बनाना चाहते हों या जीवनसाथी, झिझक छोड़िए और अपने दिल की बात कह डालिए।
- फोटो : डेमो
वैलेंटाइन वीक के पहले दिन यानी रोज डे पर बृहस्पतिवार को लोगों ने दोस्ती और मोहब्बत का इजहार किया। आज प्रपोज डे है, यानी वह दिन जब आप किसी को अपना दोस्त या जीवनसाथी बनाने का प्रस्ताव रख सकते हैं। ऐसा करने में अक्सर लोगों को डर होता है कि सामने वाले ने अगर न कह दिया तो फिर क्या होगा, लेकिन इसका कोई दूसरा उपाय भी नहीं है, क्योंकि एक न एक दिन आपको आगे बढ़कर प्रपोज करना ही पड़ता है, और ऐसा करने वाले आप पहले शख्स भी नहीं होंगे। आज हम लखनऊ के उन लोगों की कहानी बता रहे हैं जिन्होंने बेहिचक अपनी बात कह डाली। आप भी पढ़िए...
डॉ. गनेश चंद्र यादव पत्नी डॉ. सुशीला यादव के साथ
- फोटो : अमर उजाला
डर था कि कहीं दोस्ती भी न चली जाए
हमारी मुलाकात मुंबई में हुई थी। मुलाकात के करीब तीन साल बाद मैं सुशीला को प्रपोज करने का प्लान करने लगा था। मैं इस बात को लेकर काफी डरा हुआ था कि अगर उसने न कह दी तो मेरा क्या होगा। हमारी दोस्ती काफी अच्छी थी और इसे मैं खोना नहीं चाहता था। बहरहाल, एक दिन हिम्मत जुटाई और बोल दिया कि मैं तुम्हारा होना चाहता हूं। उन्होंने हां कर दिया। यह सुनते ही लगा जैसे मैंने सारा जहां जीत लिया।
हमारी मुलाकात मुंबई में हुई थी। मुलाकात के करीब तीन साल बाद मैं सुशीला को प्रपोज करने का प्लान करने लगा था। मैं इस बात को लेकर काफी डरा हुआ था कि अगर उसने न कह दी तो मेरा क्या होगा। हमारी दोस्ती काफी अच्छी थी और इसे मैं खोना नहीं चाहता था। बहरहाल, एक दिन हिम्मत जुटाई और बोल दिया कि मैं तुम्हारा होना चाहता हूं। उन्होंने हां कर दिया। यह सुनते ही लगा जैसे मैंने सारा जहां जीत लिया।
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- फोटो : डेमो
वैलेंटाइन डे के दो दिन बाद है सालगिरह
हमारी शादी तीन साल पहले 16 फरवरी हो हुई। हालांकि हम दोनों चाहते थे कि हमारी शादी 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे के दिन ही हो, लेकिन बात बनी नहीं और शादी दो दिन बाद हुई।
हमारी शादी तीन साल पहले 16 फरवरी हो हुई। हालांकि हम दोनों चाहते थे कि हमारी शादी 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे के दिन ही हो, लेकिन बात बनी नहीं और शादी दो दिन बाद हुई।
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- फोटो : डेमो
उनकी सादगी का हुआ कायल
सुशीला मुंबई में पली बढ़ीं लेकिन उनमें दिखावा बिल्कुल नहीं है। उनकी सादगी का मैं कायल था। हमारी दोस्ती आगे बढ़ी और हम एक-दूसरे को अच्छे से जानने लगे। उनका मेरे परिवार में घुलना-मिलना और हर टॉपिक पर एकदम क्लीयर राय रखना मुझे बेहद पसंद है।
डॉ. गनेश चंद्र यादव, सीनियर रेजीडेंट, जनरल सर्जरी, केजीएमयू पत्नी डॉ. सुशीला यादव के साथ
सुशीला मुंबई में पली बढ़ीं लेकिन उनमें दिखावा बिल्कुल नहीं है। उनकी सादगी का मैं कायल था। हमारी दोस्ती आगे बढ़ी और हम एक-दूसरे को अच्छे से जानने लगे। उनका मेरे परिवार में घुलना-मिलना और हर टॉपिक पर एकदम क्लीयर राय रखना मुझे बेहद पसंद है।
डॉ. गनेश चंद्र यादव, सीनियर रेजीडेंट, जनरल सर्जरी, केजीएमयू पत्नी डॉ. सुशीला यादव के साथ