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कोरोना वॉरियर्स: अब खुद मनोवैज्ञानिक मुश्किलों से जूझ रहे संक्रमण के दौरान लोगों को जिंदगी देने वाले डॉक्टर

Thu, 27 May 2021 04:49 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 27 May 2021 04:49 PM IST
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corona warrior doctors are facing psychological problems.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमितों की जान बचाते हमारे फ्रंटलाइन वर्कर डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी खुद संक्रमित हो गए। इतना ही नहीं चारों तरफ सांस बचाने के लिए मची चीत्कार, गंभीर होते मरीज, लगातार होती मौतों ने इन्हें भी झकझोर कर रख दिया। रातों की नींद इन्होंने भी खोई और घबराहट, बेचैनी, तनाव ने भी इन्हें घेरा, इसके बावजूद ये बहादुर योद्धा की तरह डटे रहे और मरीजों की सांस बचाने के लिए लड़ते रहे।



कोरोना से जारी जंग के दौरान धीमी पड़ती संक्रमण की रफ्तार के बीच इन्होंने अनिद्रा, तनाव और अपराधबोध का इलाज करवाना शुरू कर दिया है। कुछ को तो ड्यूटी के दौरान काउंसलिंग व दवा की जरूरत पड़ गई थी। इन हालात को देखते हुए केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग ने साथी डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अग्रवाल ने बताया कि हर शनिवार वर्कशाप होगी।

कानों में गूंज रहा आईसीयू का अलार्म
बलरामपुर कोविड अस्पताल में ड्यूटी करने वाले एक चिकित्सक कहते हैं कि हमारा काम ही वहां से शुरू होता है, जब मरीज वेंटिलेटर पर आता है। मौतों का सिलसिला जारी था। शुरुआती 14 दिनों की ड्यूटी में नींद आंखों से दूर रही, कभी आंख लग भी गई तो वेंटिलेटर यूनिट की बीप और अलार्म कानों में गूंजते रहते थे। नींद की दवाई भी ली और दिक्कत बढ़ने पर अपने अस्पताल के ही मनोचिकित्सक से परामर्श लिया।

corona warrior doctors are facing psychological problems.
प्रतीकात्मक तस्वीर

थकने के बाद भी नहीं आती नींद
कोविड आईसीयू वार्ड आरएएलसी, केजीएमयू में ड्यूटी करने वाले एसआर के शब्दों में- यूं तो हमारी ट्रेनिंग ही ऐसी होती है कि हम जिंदगी और मौत को लेकर प्रैक्टिकल होते हैं, लेकिन महामारी में मौत को जिस तरह करीब से देखा वह भयावह है। मैं हूं या हमारे डॉक्टर, उन्होंने इस हकीकत को करीब से देखा कि किसी को इलाज किसी को बेड नहीं मिल रहा। हम सबके मन में डर था और है कि यदि हमें या हमारे परिवार के किसी सदस्य को कुछ हुआ तो क्या हम उन्हें इलाज दे पाएंगे। सबकुछ एक ट्रायल पर है। हर पल सिरदर्द रहता है, थकने पर भी नींद नहीं आती है। एक अनजाना डर सबको है। फर्ज से मुंह मोड़ नहीं सकते। मुझे मनोचिकित्सक से परामर्श लेना पड़ा।

corona warrior doctors are facing psychological problems.
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

अफसोस है कि भतीजे को नहीं बचा सका
एक वरिष्ठ डॉक्टर इन दिनों अपराधबोध लेकर जी रहे हैं और उन पर तनाव जबरदस्त तरीके से हावी है। वह दोस्त से बात करते वक्त यही दोहराते हैं कि अफसोस है कि एक डॉक्टर होकर अपने भतीजे को नहीं बचा पाया।

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corona warrior doctors are facing psychological problems.
डॉ. आदर्श त्रिपाठी, डॉ. शशि राय और डॉ. पीके श्रीवास्तव। - फोटो : amar ujala

मनोरोग विशेषज्ञों की बात
केजीएमयू में मानसिक रोग विभाग के डॉ. आदर्श त्रिपाठी कहते हैं कि दस सालों में शायद ही अपने बैचमेट के दस एमबीबीएस का मैंने इलाज किया होगा। इधर के दिनों में 6-7 डॉक्टरों ने संपर्क किया। बलरामपुर अस्पताल के मनोरोग चिकित्सक डॉ. पीके श्रीवास्तव कहते हैं कि चार से छह हफ्तों की बात करें तो मेरे जानने वाले या जानने वालों के माध्यम से औसतन दो डॉक्टरों ने तो फोन किया, जो किसी न किसी तरह के दबाव से बाहर आने की कोशिश कर रहे थे। उधर, मानसिक रोग विशेषज्ञ व संबल नशा उन्मूलन केन्द्र व मानसिक रोग विभाग की निदेशक डॉ. शशि राय कहती हैं कि धीरे-धीरे तनाव, अवसाद को लेकर बातें हो रही हैं। फोन करने वालों में पांच फीसदी डॉक्टर हैं। 

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corona warrior doctors are facing psychological problems.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

आईसीयू यूनिट इंचार्ज ने बताए तनाव के कारण
कोविड आईसीयू, आरएएलसी केजीएमयू के एक यूनिट इंचार्ज ने कहा कि तनाव के ये कारण हैं-
- घंटों पीपीई किट पहने रहना।
- हर कोई आईसीयू में ड्यूटी के लिए प्रशिक्षित नहीं।
- मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा, हमें या परिवार को कैसे मिलेगा?
- घर-परिवार से दूर, घर में होकर भी एक दूरी को जीना है।
- बीमार परिजन को देखने नहीं जा सकते।
- स्टूडेंट ड्यूटी कर रहे, पढ़ाई दो साल से नहीं हो पा रही। 
- आर्थो या सर्जरी का स्टूडेंट कोविड मरीजों के लिए क्या कर पाएगा, उसका भी विषय प्रभावित हो रहा।
- सरकारी डॉक्टर तो कुछ बोल नहीं सकता, फर्ज छुट्टी लेकर घर बैठने नहीं देता।

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