एक ओर लखनऊ विश्वविद्यालय में नई इमारतें खड़ी हो रही हैं तो दूसरी ओर छात्रावासों का बुरा हाल है। बारिश में हबीबुल्लाह हॉस्टल में विद्यार्थी कमरे में छाता लगाकर किताबें और बिस्तर बचा रहे हैं।
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हॉस्टल का हाल
- फोटो : amar ujala
करीब 100 साल पुराने इस छात्रावास के हालात बदतर हैं। दूसरी मंजिल पर स्थित ज्यादातर कमरों में पानी टपक रहा है।
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पन्नी लगाकर अपनी किताबें बचाते छात्र
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इसके बगल के सुभाष और महमूदाबाद छात्रावास की हालत भी ऐसी ही है। उधर, आचार्य नरेंद्र देव छात्रावास एक साल से मरम्मत के नाम पर बंद पड़ा है। वहीं, लविवि प्रशासन बजट के अभाव में मरम्मत न करा पाने की बात कह रहा है।
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हॉस्टल का हाल
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छात्रों ने बताया कि हॉस्टल या किसी अन्य बात की शिकायत पर चीफ प्रोवोस्ट और प्रॉक्टर निष्कासन और निलंबन की धमकी देते हैं।
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हॉस्टल का हाल
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ऐसे में इन हालातों में रहना मजबूरी है। वहीं, फीस जमा कर देने के चलते हॉस्टल छोड़ना भी संभव नहीं है।