पुलिस स्मृति दिवस पर लखनऊ में रविवार सुबह पुलिस लाइन में हुए समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चार शहीदों के परिवारीजनों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री और डीजीपी से बहादुरी की सराहना सुनकर परिवारीजन गौरवान्वित थे, लेकिन आंसू थम नहीं रहे थे।
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शहादत पर बोले परिवारीजन; ‘जी भर के देख भी नहीं पाई, वो शहीद हो गए’
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 22 Oct 2018 01:50 PM IST
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पुलिस स्मृति दिवस
- फोटो : amar ujala
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मुख्य आरक्षी रामवृक्ष सिंह की पत्नी कांती सिंह
- फोटो : amar ujala
पति पर गर्व, पर बिछुड़ने का गम
वाराणसी में 16 फरवरी 18 को गुंडों के हमले का शिकार बने 34वीं वाहिनी पीएसी के मुख्य आरक्षी रामवृक्ष सिंह की पत्नी कांती सिंह को पति की शहादत पर गर्व और बिछुड़ने का गम था। कांती ने बताया कि रामवृक्ष मेस के लिए खाद्य सामग्री क्रय करने मुख्य आरक्षी शिवप्रसाद पाल के साथ निकले थे। विपरीत दिशा से आए बाइक सवार युवकों ने टक्कर मारी और इसके बाद दुकानदारों के साथ मिलकर हमला कर दिया। रामवृक्ष काफी देर तक भिड़े रहे। इस बीच एक हमलावर ने लोहे के स्टूल से उनके सिर पर वार कर दिया। रामवृक्ष लहूलुहान होकर गिर गए और 21 फरवरी को अस्पताल में उनकी मौत हो गई। कांती ने कहा कि परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़े बेटे की दिमागी हालत ठीक न होने से छोटे बेटे अंकित को पिता के स्थान पर नौकरी की कार्यवाही चल रही है।
वाराणसी में 16 फरवरी 18 को गुंडों के हमले का शिकार बने 34वीं वाहिनी पीएसी के मुख्य आरक्षी रामवृक्ष सिंह की पत्नी कांती सिंह को पति की शहादत पर गर्व और बिछुड़ने का गम था। कांती ने बताया कि रामवृक्ष मेस के लिए खाद्य सामग्री क्रय करने मुख्य आरक्षी शिवप्रसाद पाल के साथ निकले थे। विपरीत दिशा से आए बाइक सवार युवकों ने टक्कर मारी और इसके बाद दुकानदारों के साथ मिलकर हमला कर दिया। रामवृक्ष काफी देर तक भिड़े रहे। इस बीच एक हमलावर ने लोहे के स्टूल से उनके सिर पर वार कर दिया। रामवृक्ष लहूलुहान होकर गिर गए और 21 फरवरी को अस्पताल में उनकी मौत हो गई। कांती ने कहा कि परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़े बेटे की दिमागी हालत ठीक न होने से छोटे बेटे अंकित को पिता के स्थान पर नौकरी की कार्यवाही चल रही है।
आरक्षी बृजेश मिश्रा की पत्नी स्वाति मिश्रा
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‘जी भर के देख भी नहीं पाई थी, वो शहीद हो गए’
बिजनौर में 21 फरवरी 18 को विधायक सुरक्षा के दौरान हादसे का शिकार हुए आरक्षी बृजेश मिश्रा की पत्नी स्वाति मिश्रा परिवारीजनों के साथ समारोह में आई थीं। डीजीपी ने शहीदों की सराहना के साथ बृजेश का नाम लिया तो स्वाति फफक पड़ी। उसे पति पर गर्व के साथ असमय बिछुड़ने का गम भी था। स्वाति ने बताया कि 19 अप्रैल 17 को बृजेश से उसकी शादी हुई थी। गौना व अन्य रस्में भी पूरी नहीं हो पाई थी। कहने को तो शादी के दस माह हुए थे, लेकिन ड्यूटी के सिलसिले में हमेशा व्यस्त रहने वाले बृजेश को जी भरकर देख भी नहीं पाई थी। मुख्यमंत्री ने बृजेश की सराहना के साथ स्वाति को ढांढस बंधाया और अफसरों को उनके परिवारीजनों का ख्याल रखने के आदेश दिए। कहा कि प्रदेश सरकार उनके साथ है।
बिजनौर में 21 फरवरी 18 को विधायक सुरक्षा के दौरान हादसे का शिकार हुए आरक्षी बृजेश मिश्रा की पत्नी स्वाति मिश्रा परिवारीजनों के साथ समारोह में आई थीं। डीजीपी ने शहीदों की सराहना के साथ बृजेश का नाम लिया तो स्वाति फफक पड़ी। उसे पति पर गर्व के साथ असमय बिछुड़ने का गम भी था। स्वाति ने बताया कि 19 अप्रैल 17 को बृजेश से उसकी शादी हुई थी। गौना व अन्य रस्में भी पूरी नहीं हो पाई थी। कहने को तो शादी के दस माह हुए थे, लेकिन ड्यूटी के सिलसिले में हमेशा व्यस्त रहने वाले बृजेश को जी भरकर देख भी नहीं पाई थी। मुख्यमंत्री ने बृजेश की सराहना के साथ स्वाति को ढांढस बंधाया और अफसरों को उनके परिवारीजनों का ख्याल रखने के आदेश दिए। कहा कि प्रदेश सरकार उनके साथ है।
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आरक्षी दीपक कुमार के पिता रामवीर
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सिसकियों के साथ पिता बोले- सम्मान दे गया बेटा
बिजनौर में विधायक की सुरक्षा में आरक्षी बृजेश मिश्रा के साथ आरक्षी दीपक कुमार की भी ड्यूटी थी। उनके साथ 21 फरवरी को लखनऊ आते समय कमलापुर थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में दीपक की भी जान गई थी। मुख्यमंत्री ने दीपक की सराहना के साथ पंडाल में बैठे उसके पिता रामवीर के पास जाकर हाल पूछा तो उनके आंसू बह चले। रामवीर बोले कि उनके दो और बेटे रोहित व नेत्रपाल हैं। सभी लोग खेती करते हैं। दीपक पुलिस में भर्ती हुआ था। वह मुश्किल से छुट्टी मिलने पर घर आता था। परिवार का खर्च उठाता था। सिसकते हुए कहा कि वह शहीद होकर सम्मान दे गया।
बिजनौर में विधायक की सुरक्षा में आरक्षी बृजेश मिश्रा के साथ आरक्षी दीपक कुमार की भी ड्यूटी थी। उनके साथ 21 फरवरी को लखनऊ आते समय कमलापुर थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में दीपक की भी जान गई थी। मुख्यमंत्री ने दीपक की सराहना के साथ पंडाल में बैठे उसके पिता रामवीर के पास जाकर हाल पूछा तो उनके आंसू बह चले। रामवीर बोले कि उनके दो और बेटे रोहित व नेत्रपाल हैं। सभी लोग खेती करते हैं। दीपक पुलिस में भर्ती हुआ था। वह मुश्किल से छुट्टी मिलने पर घर आता था। परिवार का खर्च उठाता था। सिसकते हुए कहा कि वह शहीद होकर सम्मान दे गया।
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शहीद आरक्षी अंकित तोमर की पत्नी नेहा
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सीएम की गोद में बेटे को देख बोली, इसे बनाऊंगी पुलिस अफसर
वर्ष 2018 के दूसरे दिन यानी दो जनवरी को शामली के कैराना में पुलिस कस्टडी से फरार इनामी साबिर से मुठभेड़ में शहीद हुए आरक्षी अंकित तोमर की पत्नी नेहा तोमर अपने दुधमुंहे बेटे दक्ष व छह साल की बेटी अवि के साथ पंडाल में बैठी थी। इस बीच परेड की सलामी के बाद मुख्यमंत्री, डीजीपी ओपी सिंह के साथ उनके पास पहुंचे। नेहा की आंखें सुर्ख और आंसू टपकते देख सीएम ने मर्म समझा और उनके दुधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर पुचकारा और परिवारीजनों से हालचाल पूछा। सीएम ने हरसंभव मदद का वादा किया तो नेहा रो पड़ी, बेटे की तरफ इशारा करके बोली कि इसे पुलिस अफसर बनाऊंगी। उसने मुख्यमंत्री को बताया कि विभाग की तरफ से सहायता मिली है और अंकित के स्थान पर उसके भाई को नौकरी देने की कार्यवाही चल रही है। पति की शहादत से गौरवान्वित नेहा ने बताया कि शादी को सिर्फ सात साल ही हुए थे। अंकित बहुत साहसी थे, तभी वे बदमाश की फायरिंग से बेखौफ होकर एके-47 से मोरचा लेते हुए दूसरी मंजिल में उसके कमरे तक जा पहुंचे थे।
वर्ष 2018 के दूसरे दिन यानी दो जनवरी को शामली के कैराना में पुलिस कस्टडी से फरार इनामी साबिर से मुठभेड़ में शहीद हुए आरक्षी अंकित तोमर की पत्नी नेहा तोमर अपने दुधमुंहे बेटे दक्ष व छह साल की बेटी अवि के साथ पंडाल में बैठी थी। इस बीच परेड की सलामी के बाद मुख्यमंत्री, डीजीपी ओपी सिंह के साथ उनके पास पहुंचे। नेहा की आंखें सुर्ख और आंसू टपकते देख सीएम ने मर्म समझा और उनके दुधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर पुचकारा और परिवारीजनों से हालचाल पूछा। सीएम ने हरसंभव मदद का वादा किया तो नेहा रो पड़ी, बेटे की तरफ इशारा करके बोली कि इसे पुलिस अफसर बनाऊंगी। उसने मुख्यमंत्री को बताया कि विभाग की तरफ से सहायता मिली है और अंकित के स्थान पर उसके भाई को नौकरी देने की कार्यवाही चल रही है। पति की शहादत से गौरवान्वित नेहा ने बताया कि शादी को सिर्फ सात साल ही हुए थे। अंकित बहुत साहसी थे, तभी वे बदमाश की फायरिंग से बेखौफ होकर एके-47 से मोरचा लेते हुए दूसरी मंजिल में उसके कमरे तक जा पहुंचे थे।