यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी ने पर्यावरण दिवस पर पारिजात का पौधा लगाया है। इतना ही नहीं पृथ्वी को बचाने के लिए सभी से ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने साथ ही उनका संरक्षण करने का भी आग्रह किया। सीएम ने जो पौधा लगाया वो कोई मामूली पौधा नहीं है। इसे कल्पवृक्ष भी माना जाता है। इस पौधे के साथ पौराणिक मान्यताएं जुड़े होने के साथ कई वैज्ञानिक महत्व भी जुड़े हैं। आइए यहां जानें...
यूपी के बाराबंकी जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर किंटूर गांव में स्थित गांव में पारिजात का पेड़ है। मंगलवार के दिन लोग इस पेड़ की पूजा करने और मनोकामनाएं मांगने आते हैं। हरिवंश पुराण के मुताबिक ये इसे कल्पवृक्ष माना जाता है जो सभी मनोकामनाएं पूरी करता है।
माना जाता है इस गांव का नाम किंटूर कुंती के नाम पर पड़ा था। मान्यता है कि पांडवों ने माता कुंती के साथ यहां अपना अज्ञातवास बिताया था। किंटूर में स्थित लंबे-चौड़े पारिजात की ज्यादातर शाखाएं मुड़ी हुई हैं। ये शाखाएं मुड़कर धरती को छूती हैं। आगे जानें इस पेड़ से जुड़ी बेहद रोचक मान्यताएं...
पारिजात वृक्ष को कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। शास्त्रों में कहा गया है कि मंथन से निकलने के बाद इंद्र देव ने इसे स्वर्ग में अपनी वाटिका में लगाया था।
इस पेड़ से जुड़ी एक और मान्यता के मुताबिक पारिजात नाम की एक राजकुमारी को भगवान सूर्य से प्यार हो गया था। बहुत कोशिशों के बाद भी सूर्य भगवान ने उसका प्यार स्वीकार नहीं किया। दुखी होकर पारिजात ने आत्महत्या कर ली। जहां पारिजात की समाधि बनाई गई वहां से एक पेड़ उगा जिसका नाम राजकुमारी के नाम पर पारिजात पड़ गया। लोग कहते है कि ये पेड़ सूर्य को देखकर खिल उठता और रात के सूर्य डूबते ही ऐसा लगता है जैसे ये पेड़ रो रहा है।