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चिंताजनक: केजीएमयू में हर 7वें दिन भर्ती हो रहा यौन शोषण का शिकार मासूम, लड़कियों का प्रतिशत ज्यादा

Wed, 17 Nov 2021 03:10 PM IST
ishwar ashish lucknow, uttar pradesh, india
lucknow, uttar pradesh, india Published by: ishwar ashish Updated Wed, 17 Nov 2021 03:10 PM IST
सार

यूपी में मासूमों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार पोर्नोग्राफी, मानसिक बीमारी और अवसाद के कारण ये घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

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Children sexual harassment is increasing in Uttar Pradesh.
- फोटो : amar ujala

हाल के दिनों में मासूमों के साथ यौन शोषण की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। केजीएमयू में हर सातवें दिन दुष्कर्म पीड़ित एक बच्चा भर्ती हो रहा है। कई बच्चों का सरकारी अस्पताल में भी इलाज होता है। पीड़ितों में लड़कियों का प्रतिशत ज्यादा है, लेकिन लड़के भी इसका शिकार हो रहे हैं। लखनऊ के आसपास के साथ यूपी के हर हिस्से से ये बच्चे केजीएमयू भेजे जा रहे हैं। ये आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं।



मनोवैज्ञानिकों व चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे अलग-अलग वजह हैं। मोबाइल फोन के माध्यम से पोर्नोग्राफी की हर किसी तक पहुंच इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है। इसके अलावा मानसिक बीमारी और अवसाद से भी ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मानिनी श्रीवास्तव के अनुसार महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाओं में पुरुषों की ओर से उन पर संप्रभुता साबित करना सबसे बड़ी वजह होती है। इसके अलावा प्रतिशोध व अन्य कारण भी इसके पीछे होते हैं।

Children sexual harassment is increasing in Uttar Pradesh.
- फोटो : अमर उजाला

बच्चे होते हैं आसान शिकार
बच्चों के मामले में स्थिति इससे काफी अलग होती है। उनके साथ दुष्कर्म व कुकर्म की घटनाओं में सबसे बड़ी वजह पोर्नोग्राफी है। बच्चे इसका इस्तेमाल करने वालों के लिए आसान शिकार होते हैं। छोटे बच्चे इसके बारे में किसी को बता भी नहीं पाते हैं। इस कारण भी ऐसी प्रवृत्ति के लोग इन घटनाओं को अंजाम देते हैं।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि जो बच्चे भावनात्मक या शारीरिक रूप से प्रताड़ना के शिकार होते हैं, वे भी इस तरह की घटना को अंजाम देकर खुद को शक्तिशाली महसूस करते हैं। वहीं, मानसिक रूप से बीमार लोग भी मासूमों से दुष्कर्म जैसा घिनौना काम करते हैं।

Children sexual harassment is increasing in Uttar Pradesh.
- फोटो : पिक्साबे

ओटीटी कंटेंट पर सेंसरशिप की जरूरत
डॉ. मानिनी श्रीवास्तव के अनुसार इस समय ओटीटी कंटेंट से काफी पोर्नोग्राफी परोसी जा रही है। इस कंटेंट पर अभी तक कोई सेंसरशिप नहीं है। इस कारण इसमें अश्लीलता और फूहड़ता की भरमार है। वहीं, इसकी रिलीज से लेकर इसे देखने वालों पर भी कोई पाबंदी नहीं है। यहां तक कि यह पता लगाना भी संभव नहीं कि किस आयुवर्ग के लोग इसे देख रहे हैं।

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Children sexual harassment is increasing in Uttar Pradesh.
- फोटो : getty images

ऑनलाइन क्लास ने हर बच्चे के हाथ में थमाया मोबाइल
कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास की मजबूरी ने हर बच्चे के हाथ में मोबाइल थमा दिए। निगरानी न होने से छोटे-छोटे बच्चे भी पोर्नोग्राफी देखने लगे। विशेषज्ञों के अनुसार 10 साल से कम आयुवर्ग के बच्चे भी इसमें शामिल हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के देखे जा रहे कंटेट की जानकारी लेते रहना चाहिए।

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Children sexual harassment is increasing in Uttar Pradesh.
- फोटो : अमर उजाला

पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. जेडी रावत का कहना है कि छोटे बच्चों से दुष्कर्म के मामले बढ़ रहे हैं। विभाग में महीने में इस तरह के चार से पांच केस आ रहे हैं। इसके पीछे की वजह की पड़ताल करने की जरूरत है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी बहुत जरूरी है।

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