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पतंग बेचकर गुजारा कर रही है 'यूपी की मैरीकॉम', तस्वीरें...

Thu, 03 Sep 2015 12:10 PM IST
Updated Thu, 03 Sep 2015 12:10 PM IST
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पतंग बेचकर गुजारा कर रही है 'यूपी की मैरीकॉम', तस्‍वीरें...

boxing champion rukhsar bano selling kites
10 नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप और 12 स्टेट चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर नौ पदक जीत चुकी कानपुर के मछरिया मोहल्ले की रुखसार बानो (19) आज तक तीन हजार का जूता नहीं ले पाई हैं। पैसों की इस कदर तंगी है कि पूरा परिवार दिनभर पतंग बनाता है और 10 घंटे में मात्र 80 रुपये कमा पाता है।

पतंग बेचकर गुजारा कर रही है 'यूपी की मैरीकॉम', तस्‍वीरें...

boxing champion rukhsar bano selling kites

रुखसार ने ग्लब्स उतारकर पतंग पकड़ ली है, 2014 से किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाई। अक्‍तूबर में फिर चैंपियनशिप है पर प्रैक्टिस को दिल्ली जाने तक के पैसे नहीं। भर्राए गले से पूछती है खिलाड़ियों के अच्छे दिन कब आएंगे।जैसे-तैसे फतेहपुर के एक प्राइवेट कॉलेज से इंटर कर रही पांच बार बेस्ट बॉक्सर का खिताब जीत चुकी रुखसार उस निम्नवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती है जहां खेल-खिलाड़ी के लिए सोचना भी दूभर है।

पतंग बेचकर गुजारा कर रही है 'यूपी की मैरीकॉम', तस्‍वीरें...

boxing champion rukhsar bano selling kites

2006 में जब केके गर्ल्स कॉलेज कानपुर में पढ़ती थी तो एक दिन बॉक्सिंग के कोच संजीव दीक्षित कुछ बच्चों को बॉक्सिंग सिखाने आए, तब पहली बार एक-दो मुक्के चलाए। कोच ने भांप लिया और हौसला बढ़ाया। कई बार कहने पर बॉक्सिंग सीखने लगी। कोच ने कोई फीस नहीं ली, उल्टा अपनी जेब से मदद करने लगे तो रुखसार के मुक्कों में दम आने लगा। साइकिल भी खरीद कर दी।

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बुलंदशहर में हुई प्रतियोगिता में 40-42 किलो भारवर्ग में गोल्ड मेडल जीत लिया। रुखसार बताती है कि थोड़ी शोहरत तो मिली लेकिन घर वाले बिफर गए। ‘ये सब नहीं चाहिए, हमारे घरों में नहीं चलता ये सब’ अब्बू ने फरमान सुना दिया। फिर भी चोरी-छिपे स्कूल में और ग्रीनपार्क में जाकर प्रैक्टिस करती रही।

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पटियाला में नेशनल खेलकर कांस्य जीत लाई और फिर घर के पते पर 10,000 की चेक आई तो अब्बू हत्थे से उखड़ गए। मोहल्ले वालों ने बहुत समझाया तो माने। ग्रीनपार्क के क्षेत्रीय खेल अधिकारी ने दो हजार रुपये महीने की मदद बांध दी पर उनके ट्रांसफर के बाद मदद भी बंद हो गई।

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