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यूपी: केमिकल फैक्टरी में ब्लास्ट मामले में बड़ा खुलासा, सच जानकर अधिकारी भी हैरान
Sun, 21 Jun 2020 09:31 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 21 Jun 2020 09:31 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला।
लखनऊ के चिनहट के उतरधौना में बीती रात केमिकल फैक्ट्री में विस्फोट का कारण ब्वॉयलर का फटना नहीं था बल्कि यह जानलेवा धमाका दो रसायनों के मिलान में हुई गड़बड़ी के कारण हुआ था। यह जानकारी एडीएम टीजी वीबी मिश्रा की अगुवाई में गठित जांच टीम की शुरूआती जांच में सामने आई है। हादसे के कारण व जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय करने को जांच टीम 48 घंटे में अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।
घायल को अस्पताल ले जाते हुए
- फोटो : अमर उजाला
मौके पर जांच के लिए पहुंची एडीएम टीजी की टीम ने बताया कि यह विस्फोट दो तरह के केमिकल आपस में मिलाने के बाद हुआ। यहां पर पौधों में लगने वाले फंगस संक्रमण को खत्म करने के लिए दवा बनाई जा रही थी। जांच टीम में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि फैक्ट्री में हाइड्रोजन पेरोक्साइड और सल्फ्यूरिक एसिड का मिश्रण तैयार किया जा रहा था, उसी की माप में हुई गड़बड़ी के बाद तेज धमाका हो गया।
boiler blast in a factory
- फोटो : अमर उजाला
शुरुआती जांच में पाया गया कि अगर यह हादसा ब्वॉयलर फटने से होता तो विस्फोट और भयानक हो सकता था। उतरधौना स्थित स्वरूप केमिकल्स फैक्ट्री में मौके पर मौजूद फतेहपुर निवासी मजदूर शेरू गंभीर घायल हो गया था और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों को कारखाना अधिनियम के अनुसार उचित मुआवजा राशि भी प्रशासन दिलवाएगा।
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boiler blast in a factory
- फोटो : अमर उजाला
एक साल के भीतर दूसरा हादसा
चिनहट क्षेत्र में एक साल के भीतर यह दूसरा बड़ा हादसा है। उतरधौना के ही पास पिछले साल 31 अगस्त को इंडियन पेस्टिसाइड फैक्ट्री से जहरीला रसायन बिना फिल्टर हुए नालियों में बहा दिया गया। इससे तिवारीपुरवा के ग्रामीणों की तीन दर्जन से अधिक भैसें मर गईं।
चिनहट क्षेत्र में एक साल के भीतर यह दूसरा बड़ा हादसा है। उतरधौना के ही पास पिछले साल 31 अगस्त को इंडियन पेस्टिसाइड फैक्ट्री से जहरीला रसायन बिना फिल्टर हुए नालियों में बहा दिया गया। इससे तिवारीपुरवा के ग्रामीणों की तीन दर्जन से अधिक भैसें मर गईं।
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boiler blast in a factory
- फोटो : अमर उजाला
अपने मवेशियों को बचाने के चक्कर में नाले में उतरे दर्जन भर लोगों के शरीर पर फफोले पड़ गए। इस मामले में फैक्ट्री सील करने के साथ ही मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उसी बीच तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने आबादी के भीतर स्थित फैक्ट्रियों को शहर से दूर करने का निर्देश दिया था।