सावन मास शुरू होने से पहले राजधानी आषाढ़ मास में तीज-त्यौहारों की फुहार में भीगेगी। 22 जून से शुरू हुए वर्ष के चौथे मास में आधा दर्जन से अधिक त्यौहारों के साथ कई धार्मिक आयोजन होंगे।
इस मास भगवान जगन्नाथ जहां शहर भ्रमण को निकलेंगे, वहीं हरिशयन एकादशी से पूर्व सड़कें बैंडबाजा बारात की धूम से गूंज उठेंगी। इसी मास गुरु पूर्णिमा पर गुरु की आराधना होगी। सावन का पहला सोमवार 30 जुलाई को पड़ेगा।
बलभद्र और सुभद्रा के साथ भगवान जगन्नाथ 14 जुलाई को नगर भ्रमण पर निकलेंगे। जयकारों के बीच रथारूढ़ भगवान जगन्नाथ को भक्त सुबह से देर रात तक भ्रमण कराएंगे। आधे दर्जन से अधिक स्थानों से निकलने वाली यात्रा में भक्त पुरी की तर्ज पर भगवान के रथ को नंगे पैर खींचेंगे। मुख्य यात्रा अमीनाबाद मारवाड़ी गली स्थित मंदिर से निकलेगी, जिसमें इस्कॉन का हरिनाम संकीर्तन दल भी शामिल होगा। इसके अलावा डालीगंज के माधव मंदिर, मोतीनगर गौड़ीय मठ, बापू भवन गेट के पास से, चौपटियां, गुडंबा, ऐशबाग मास्टर कन्हैया लाल रोड से गाजे-बाजे के साथ रथयात्रा निकाली जाएगी।
जुलाई में छह सहालग के चलते सड़कें बैंड बाजा और बारात से गुलजार होगी। जुलाई में 5, 6, 9, 10, 11 और 16 जुलाई को सहालग रहेंगी। उसके बाद हरिशनी एकादशी के चलते सहालग थमेंगी। जाड़ों में सहालग का टोटा रहेगा। 18 जून से चल रहा बैंड बाजा और बारात का दौर 16 जुलाई को थमेगा।
हरिशयनी एकादशी पर 23 जुलाई से पूजा-पाठ और कीर्तन के बाद भगवान नारायण शयन करेंगे। इसी के साथ चौमासा शुरू हो जाएगा। चौमासे के दौरान साधु-संतों का विचरण रुकेगा। वे चार महीनों तक एक ही स्थान पर रुके रहेंगे। जैन मुनि जैन मंदिरों में प्रवास करेंगे। शयन के दौरान सभी मांगलिक कार्य रुके रहेंगे।