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अनुष्का शर्मा ने आखिर क्यों कहा- मेरे अंदर 'ममता' नहीं, यहां पढ़ें पूरा मामला
टीम डिजिटल, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 18 Sep 2018 08:35 AM IST
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varun dhawan and anushka
- फोटो : amar ujala
कॉमनमैन होना सच में बड़ा कठिन है। कॉमनमैन की भीड़ में ही आप खो जाते हैं और आपकी अलग पहचान तब बनती है जब आप कुछ अलग करते हैं। ये कहना है बॉलीवुड स्टार अनुष्का शर्मा और वरुण धवन का। फिल्म सुई-धागा के प्रमोशन के लिए सोमवार को विश्वकर्मा पूजा पर लखनऊ पहुंचे दोनों स्टार ने इंडस्ट्रीयल एरिया में पहले भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना की। फिर एक होटल में अमर उजाला से बातचीत में फिल्म से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। पेश है बातचीत के कुछ अंश-
varun dhawan and anushka sharma
- फोटो : amar ujala
- फिल्म की शूटिंग के दौरान किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा?
अनुष्का कहती हैं कि मेहनत तो हमारा काम है। मुश्किल हालातों में काम करने के बाद दर्शकों से जब प्यार मिलता है तो शूटिंग के दौरान आई सारी दिक्कतें छोटी लगती हैं। वहीं, वरुण ने कहा कि चंदेरी जैसे इलाके में काम करना थोड़ा टफ था लेकिन काम का जो सकारात्मक माहौल और प्यार वहां मिला वो जिंदगी भर याद रहेगा।
अनुष्का कहती हैं कि मेहनत तो हमारा काम है। मुश्किल हालातों में काम करने के बाद दर्शकों से जब प्यार मिलता है तो शूटिंग के दौरान आई सारी दिक्कतें छोटी लगती हैं। वहीं, वरुण ने कहा कि चंदेरी जैसे इलाके में काम करना थोड़ा टफ था लेकिन काम का जो सकारात्मक माहौल और प्यार वहां मिला वो जिंदगी भर याद रहेगा।
varun dhawan and anushka sharma
- फोटो : amar ujala
- शूटिंग के दौरान धूप में साइकिल चलाना और फिर साइकिल से गिरना, ये सब कितना तकलीफदेह था?
वरुण ने कहा कि धूप में मैं 10-12 किमी. साईकिल चलाता था, जबकि अनुष्का उस पर बैठती थी। चिलचिलाती धूप में ये सीन शूट होने में पसीने छूट जाते थे। अनुष्का कहती है कि हम गिरे भी थे। हालांकि, चोट सिर्फ वरुण को ही लगी। वरुण ने बताया कि एक बार 2000 मीटर तक दौड़ते-दौड़ते मुझे तो उलिटयां होने लगी थीं, फिर भी मैं बहुत कूल था।
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varun dhawan and anushka
- फोटो : amar ujala
- फिल्म में ऐसा क्या था, जिसे करने के लिए आप दोनों राजी हो गए?
इस सवाल का जवाब देते हुए वरुण धवन ने कहा कि जब मैंने फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी तो मैं खूब हंसा था। लेकिन, जब मैंने दोबारा इसे पढ़ा तो मुझे लगा कि इसे जरूर करना चाहिए क्योंकि ये फिल्म सबके लिए है। इसे कोई भी देख सकता है। ये फिल्म पारिवारिक है तो इसमें लव स्टोरी भी है। कॉमेडी है तो इमोशन भी है और सबसे खास बात कि ये फिल्म मेड इन इंडिया को प्रमोट करती है। वहीं, अनुष्का ने कहा कि ये फिल्म जमीन से जुड़ी है। ये मेहनत और जज्बे की भी कहानी है। ये दिखाती है कि किस तरह इंसान मेहनत के बलबूते अपने पुश्तैनी काम को मार्केट में अच्छी पहचान दिलाता है।
इस सवाल का जवाब देते हुए वरुण धवन ने कहा कि जब मैंने फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी तो मैं खूब हंसा था। लेकिन, जब मैंने दोबारा इसे पढ़ा तो मुझे लगा कि इसे जरूर करना चाहिए क्योंकि ये फिल्म सबके लिए है। इसे कोई भी देख सकता है। ये फिल्म पारिवारिक है तो इसमें लव स्टोरी भी है। कॉमेडी है तो इमोशन भी है और सबसे खास बात कि ये फिल्म मेड इन इंडिया को प्रमोट करती है। वहीं, अनुष्का ने कहा कि ये फिल्म जमीन से जुड़ी है। ये मेहनत और जज्बे की भी कहानी है। ये दिखाती है कि किस तरह इंसान मेहनत के बलबूते अपने पुश्तैनी काम को मार्केट में अच्छी पहचान दिलाता है।
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varun dhawan and anushka
- फोटो : amar ujala
- आप दोनों गांव को किस नजरिए से देखते हैं?
वरुण ने कहा कि गांव में बहुत स्कोप है। हमारे देश के सारे पुश्तैनी काम तो गांव से ही शुरू हुए हैं। हर गांव और हर शहर की अपनी विशेषता है। पुराने कारीगरों के हाथ में जो जादू है, वो आजकल की कपड़े की फैक्ट्री में कहां देखने को मिलता है। चाहे आप चंदेरी का काम देख लीजिए या फिर लखनऊ की चिकनकारी का, पुश्तैनी कारीगरों का ही काम बोलता है।
वरुण ने कहा कि गांव में बहुत स्कोप है। हमारे देश के सारे पुश्तैनी काम तो गांव से ही शुरू हुए हैं। हर गांव और हर शहर की अपनी विशेषता है। पुराने कारीगरों के हाथ में जो जादू है, वो आजकल की कपड़े की फैक्ट्री में कहां देखने को मिलता है। चाहे आप चंदेरी का काम देख लीजिए या फिर लखनऊ की चिकनकारी का, पुश्तैनी कारीगरों का ही काम बोलता है।