मशहूर शायर ‘मजाज’ लखनवी मूलत: रुदौली के थे। अब्बा चौधरी सिराज उल हक ने जमींदार होने के बावजूद असरार उल हक (मजाज) को पढ़ाने के लिए सरकारी नौकरी की और लखनऊ में घर लेकर रहे। अमीनाबाद इंटर कॉलेज में असरार का प्रवेश कराया। बाद में वालिद का ट्रांसफर आगरा होने से आगे की पढ़ाई आगरा के सेंट जोंस कॉलेज में हुई, जहां वह मैकश अकबराबादी जैसों की सोहबत में शायरी करने लगे। अपना तखल्लुस ‘शहीद’ रख लिया।
बीए के बाद उनकी पढ़ाई अलीगढ़ में हुई, जहां उनकी मुलाकात मंटो, चुगतई, अली सरदार जाफरी और जां निसार अख्तर से हुई तो शेरो-शायरी का शौक बढ़ गया। उन्होंने अपना तखल्लुस बदलकर ‘मजाज’ कर दिया। पूर्व मंत्री शायर मिजाज कमाल यूसुफ मलिक बताते हैं, ‘मजाज साहब लखनऊ में रहते थे। अंग्रेजों से उनको नफरत थी। उन्होंने एक कुत्ता पाला और अंग्रेजों को चिढ़ाने के लिए उसका नाम रखा ‘नेल्सन’।
एक दिन सआदत हसन मंटो और सरदार जाफरी लखनऊ आए। तीनों ने मेफेयर में फिल्म देखने का फैसला किया। ‘नेल्सन’ को लेकर पहुंच गए और काउंटर पर पहुंचकर नेल्सन सहित चार टिकट ले लिए। जब तीनों दोस्त अंदर हो गए तो कुत्ता भी पीछे जाने लगा। गेटकीपर ने उसे रोकते हुए मजाज से पूछा, ‘चौथा कौन?’ तीनों के मुंह से निकला, ‘नेल्सन’।
गेटकीपर ने कहा, ‘ठीक।’ पर, जब कुत्ता को लेकर आगे बढ़े तो फिर रोक दिए गए। तीनों नाराज हो गए। गेटकीपर ने मैनेजर को बुलाया, जो अंग्रेज था। कहा, ‘डाग नॉट अलाऊ।’ पर, तीनों ने कहा, ‘हमने टिकट लिया तो जाएगा ही।’ मैनेजर ने तीनों को मनाया। अपने कक्ष में ले गया।
तीनों के साथ नेल्सन भी अंदर गया। मैनेजर ने चाय पिलाई और मिन्नत कर जुर्माना सहित उनके टिकट के पैसे लौटाए।’ तीनों दोस्त बाहर निकले और ठहाका लगाते हुए बोले, ‘अपने घरों पर ‘इंडियन टॉमी नॉट अलाऊ’ लिखने वाले अंग्रेज को आज अपने ‘नेल्सन’ के साथ हम सबको अंदर बुलाकर चाय पिलानी पड़ी।