तीन ट्रेनों से लौटे 3,428 श्रमिक, बोले- घर तो आ गए, लेकिन अब वापस लौटना मुश्किल
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दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों की घर वापसी का सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहा। तीन श्रमिक स्पेशल ट्रेनें लखनऊ पहुंची, जिनसे करीब 3428 श्रमिकों ने यात्रा की। जबकि हैदरबाद से आने वाली ट्रेन सीधे बाराबंकी ले जाई गई। यात्रियों को थर्मल स्कैनिंग कर बस से घर भेजवा दिया गया। पहली ट्रेन, बंगलुरु से चलकर सुबह 6:40 पर चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंची। इस ट्रेन से 1192 श्रमिक लखनऊ पहुंचे। इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से 43 बसों की व्यवस्था की गई थी।
वहीं, दूसरी ट्रेन केरल के एर्नाकुलम से चल कर सुबह 10:15 बजे चारबाग रेलवे स्टेशन पर पहुंची। इस ट्रेन से 1072 श्रमिक लखनऊ पहुंचे। उनके लिए रोडवेज की ओर से 40 बसों की व्यवस्था की गई थी।
जालंधर से 1164 यात्रियों को लेकर ट्रेन गत रात लखनऊ पहुंची तो यहां से 38 रोडवेज बसों के जरिए इन सभी को उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया। हैदराबाद से सुबह 6:30 बजे बाराबंकी रेलवे स्टेशन पहुंची। ट्रेन चारबाग के रास्ते गुजरी, लेकिन यहां रुकी नहीं।
करीब 10 साल पहले यूपी से रोजीरोटी के लिए पंजाब गया था। पहले मजदूरी की, फिर एक निजी कंपनी में जॉब मिल गई लेकिन इस लॉकडाउन ने मेरी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। गृहस्थी उजड़ सी गई और फाकों की नौबत आ गई। वापस लौट रहे हैं, लेकिन दोबारा जाकर वहां पर बस पाएंगे या नहीं, यह सोचकर सिहरन पैदा हो जाती है।
प्रतापगढ़ के रहने वाले अंकित ने अपनी आपबीती कुछ इन्हीं लफ्जों में बयां की। वह श्रमिक स्पेशल ट्रेन से चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंचे थे, जहां पर थर्मल स्कैनिंग करने के बाद उन्हें घर रवाना कर दिया गया।
ऐसे ही बहराइच के रहने वाले अंशुल ने बताया कि लॉकडाउन के चलते उनके पास जो भी जमा पूंजी थी, खर्च हो गई। उन्होंने केरल से लखनऊ आने का प्रयास भी किया, पर पुलिस ने दबोच लिया। अब जब वहां से वापस लौटे हैं तो जेब खाली हो चुकी हैं और घर वापस जाकर क्या करेंगे, इसका भी पता नहीं।