World Malaria Day 2023: विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलता है। बच्चों में मलेरिया की गंभीर स्थिति जानलेवा हो सकती है। सामान्यत: मलेरिया वातावरण में नमी या बरसात के मौसम में जमा पानी के कारण होता है। नमी के कारण संक्रमण और बैक्टीरिया के पनपने के लिए यह सबसे उपयुक्त परिस्थिति हो सकती है। मलेरिया के मच्छर के काटने पर कुछ सामान्य लक्षण दिखते हैं, जिसमें बुखार, सिर दर्द, उल्टी आना, ठंड लगना, थकान होना, चक्कर आना और पेट में दर्द हो सकता है। मलेरिया के इलाज के लिए करीब दो सप्ताह तक दवाइयां चलती हैं। हालांकि मलेरिया के इलाज के बाद भी कमजोरी और थकान रहती है। बीमारी के बाद रिकवरी में समय लगता है।
World Malaria Day 2023: मलेरिया से जल्द स्वस्थ होने के लिए रोजाना करें इन योगासनों का अभ्यास, कमजोरी होगी दूर
सिद्धा वाॅक
ध्यान पूर्वक टहलने को सिद्धा वाॅक का नाम दिया गया। सिद्धा वाॅक को 8 वाॅकिंग के नाम से भी जाना जाता है। फिट रहने और वजन कम करने के लिए लोग वाॅक करते हैं। वाॅक मन और मस्तिष्क को शांत कर सकता है। सिद्धा वाॅक से सेहत को कई लाभ मिल सकते हैं। आप घर पर कमरे में, छत पर या बागीचे में इसे कर सकते हैं। आमतौर पर सिद्धा वाॅक को योग से जोड़ा जाता है, क्योंकि ये वाॅकिंग के साथ ही मेडिटेशन का काम करता है।
सिद्धा वाॅक 8 के शेप में होती है, जिसमें दक्षिण से उत्तर दिशा में लगभग 6 फीट के दो गोले होते हैं। दोनों गोलों के बीच लगातार वाॅक करना होता है। इस दौरान मन को शांत रखना होता है। पेट पूरी तरह से खाली होना चाहिए और नंगे पैर वाॅक करनी चाहिए।
वज्रासन योग
वज्रासन योग पाचन तंत्र को तुरुस्त रखता है, मन को शांत करता है। नींद और ब्लड प्रेशर की परेशानी को कम करने के साथ ही इम्यूनिटी मजबूत करता है। इस आसन को करने के लिए घुटनों को टेककर बैठ जाएं। पीठ सीधी रखते हुए एड़ियों के बीच गैप में कूल्हों को टिका लें। अब दोनों हाथों को गोद में रखते हुए कुछ देर इसी मुद्रा में बैठे रहें।
शक्ति मुद्रा
मौसम में बदलाव या डेंगू-मलेरिया के कारण होने वाले सर्दी-जुकाम और बुखार की समस्या से राहत पाने के लिए शक्ति मुद्रा फायदेमंद है। अस्थमा के रोगियों के साथ ही प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए शक्ति मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए। इस मुद्रा के अभ्यास के लिए सबसे पहले दोनों हाथों के अंगूठों को शेष उंगलियों के बीच दबाकर मुट्ठी बना लें। अब नाभि के नीचे पेट पर हल्के से हाथ रखें। दोनों मुट्ठियों के बाच दो इंच का अंतर हो। लंबी, गहरी और धीमी श्वास लेते हुए दिन में दो तीन बार इसका अभ्यास कर सकते हैं।
भस्त्रिका प्राणायाम
यह प्राणायाम शरीर के विषाक्त पदार्थों को खत्म करता है और फेफड़ों में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को कम कर सकता है। इसके अभ्यास से गले की सूजन और कफ भी कम हो सकता है।
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