National Dengue Day 2025: राष्ट्रीय डेंगू दिवस हर साल 16 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य डेंगू बुखार के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना और इससे बचाव के लिए सतर्कता बरतने का संदेश देना है। भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय इस दिन विशेष रूप से स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन करता है।
डेंगू हर साल एक बड़ी आबादी को प्रभावित करता है। डेंगू एक वायरल बुखार है, जो मच्छर के काटने से होता है। डेंगू के कारण तेज बुखार, शरीर दर्द, सिर दर्द, गले में खराश और जुकाम हो सकता है। इस दौरान शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। डेंगू के इलाज के बाद भी शरीर में कमजोरी रहती है। डेंगू से लड़ाई सिर्फ दवाइयों से नहीं, बल्कि शरीर और मन को मजबूत बनाकर भी जीती जा सकती है। ऐसे में योग एक प्राकृतिक उपचार पद्धति के रूप में डेंगू के बाद रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां कुछ ऐसे योगासनों के बारे में जानकारी दी जा रही है, जो डेंगू से जल्द रिकवरी में सहायक है
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शवासन
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शवासन
डेंगू के बाद शरीर कमजोर महसूस करता है और थकान आती है। ऐसे में शवासन का अभ्यास पूरी तरह शरीर को विश्राम देता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से डेंगू के बाद की थकान दूर होती है।
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कपालभाति प्राणायाम
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प्राणायाम
अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका और कपालभाति ये तीनों ही प्राणायाम डेंगू मरीजों के लिए असरदार हैं। इन प्राणायाण के अभ्यास से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। रक्त संचार में सुधार होता है और मानसिक तनाव कम करने में भी अनुलोम विलोम और कपालभाति जैसे प्राणायाम सहायक हैं।
बालासन
इस आसन का अभ्यास थकान और कमजोरी को दूर करता है। बालासन शरीर को आराम देता है। इस आसन के अभ्यास से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।
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मच्छर के काटने से डेंगू होता है
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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योग गुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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