शरीर के उत्तम स्वास्थ्य के लिए हार्मोन्स का संतुलित रहना बेहद आवश्यक माना जाता है। हार्मोन हमारे शरीर को ऊर्जा प्राप्त करने, मेटाबॉलिज्म, मनोदशा औऱ पाचन को ठीक रखने के साथ, शरीर के विकास और प्रजनन कार्यों को व्यवस्थित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली की खराब आदतों और खान-पान ठीक न होने के कारण ज्यादातर लोग हार्मोन्स के असंतुलन के शिकार हो जाते हैं। हार्मोन्स में असंतुलन मोटापा, पीसीओएस और थायरॉयड जैसे विकारों का कारण बन सकता है।
सलाह: हार्मोन्स में असंतुलन से परेशान लोगों के लिए राहत, इन चार योगासनों से मिलेंगे अविश्वसनीय लाभ
श्वास लेना और सांस छोड़ना
सांस के सभी अभ्यास शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। इस योग को करने के लिए सबसे पहले आरामदायक स्थिति में चटाई पर बैठ जाएं। अपने हाथों को योग के आसन की मुद्रा में रखकर धीरे-धीरे सांस को अंदर लें। जब आप श्वास लेते हैं तो शरीर फैलता है और सांस छोड़ते पर यह सिकुड़ता है। गहरी सांस वाले यह योगासन शरीर को अंदर से मजबूती देने के साथ हार्मोन्स के असंतुलन को ठीक करने में सहायक हो सकते हैं। इस अभ्यास को 5-10 मिनट तक रोजाना करें।
मकरासन
मकरासन योग अभ्यास को रीढ़ की हड्डी, कमर और पीठ के दर्द से छुटकारा दिलाने के साथ हार्मोन्स के असंतुलन को ठीक करने में सहायक माना जाता है। इस योग को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अब अपने सिर और कंधों को ऊपर उठाएं और ठोड़ी को हथेलियों पर और कोहनियों को ज़मीन पर टिका लें। सांस लेते हुए माथे को ऊपर उठाएं और आराम से सांस को छोड़ें। इस अभ्यास को 20-30 बार किया जा सकता है।
भुजंगासान
पेट और पीठ को आराम दिलाने के साथ यह योग अभ्यास शरीर में हार्मोन्स के असंतुलन को ठीक करता है। इस अभ्यास को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाइए और हथेली को कंधे के नीचे रखिए। सांस लेते हुए शरीर के अगले भाग को ऊपर की और उठाएं। 10-20 सेकंड्स के लिए इसी अवस्था में रहिए फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस अभ्यास को नियमित रूप से 10-15 बार किया जा सकता है।
कैट पोज (मार्जरी आसन)
शरीर के कई अंगों के लिए इस योगासन को फायदेमंद माना जाता है। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले हथेलियों और घुटनों को योग मैट पर रखते हुए शरीर को ऊपर उठाएं और टेबल पोज में आ जाएं। अपने पैरों के बीच गैप रखें और अपनी उंगलियों को चौड़ा करें। अब ऊपर की ओर देखते हुए श्वास अंदर लें। अपनी ठुड्डी को अपनी छाती तक ले जाकर सांस छोड़ें। इस योग का अभ्यास नियमित रूप से 10-15 बार किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।
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